बांग्लादेश में हिंसा की आग, सूफी संत की कब्र अपवित्र और अवामी लीग सहयोगी दल का दफ्तर जला

ढाका। बांग्लादेश में हिंसा की दो भयावह घटनाएँ हुईं। एक में, एक इस्लामी भीड़ ने एक सूफी संत की कब्र को जलाकर अपवित्र किया, जबकि दूसरी घटना में एक अन्य समूह ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग की सहयोगी जातीय पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में आग लगा दी। दोनों ही घटनाएँ क्रूर थीं। इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि देश की अंतरिम सरकार का अभी भी कट्टरपंथियों पर कोई नियंत्रण नहीं है। पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुस्लिम एकेश्वरवादी होने का दावा करने वाले लोगों के एक समूह ने सूफी संत दरवेश नूरा पगला के निधन के दो सप्ताह बाद कब्र से उनके शव को निकाला और उसे अपवित्र करके जला दिया। उन्होंने शुक्रवार की नमाज के बाद पश्चिमी राजबाड़ी जिले में उनकी दरगाह में भी तोड़फोड़ की। इसके बाद भड़के दंगे में पगला के अनुयायियों और इस्लामी कट्टरपंथियों के बीच झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हो गए।
दूसरी घटना में, ढाका के पुराना पलटन इलाके में जातीय पार्टी (जेपी) कार्यालय को आग लगा दी गई। यह घटना गोनो अधिकार परिषद के नेता नूरुल हक नूर के एक हमले में गंभीर रूप से घायल होने के एक हफ्ते बाद हुई, जब सेना के जवान पुलिस बलों की सहायता के लिए आए और समूह के कार्यकर्ताओं पर हमला किया। गोनो अधिकार परिषद पिछले साल जुलाई के विद्रोह के हिंसक आंदोलन से जुड़ा एक समूह है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के एक आधिकारिक बयान में इसे क्रूर बताया गया। पुलिस ने गोनो अधिकार परिषद के कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए तीन ध्वनि ग्रेनेड और पानी की बौछारें दागीं। इसके बाद भीड़ ने पुलिस और स्थानीय प्रशासनिक प्रमुख के वाहनों में आग लगा दी। इस घटना में गुस्साई भीड़ ने कई जगहों पर उत्पात मचाया।
मालूम हो कि पिछले हफ्ते सेना और पुलिस ने गोनो अधिकार परिषद के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया था। अगले दिन अंतरिम सरकार की ओर से जारी बयान में इसे निर्मम कार्रवाई बताया गया था। सरकार ने कहा था, ‘इस तरह की हिंसक हरकतें न केवल नूर पर हमला हैं, बल्कि यह उस लोकतांत्रिक आंदोलन की भावना पर हमला है जिसने देश को न्याय और जवाबदेही के लिए एकजुट किया।’ बताया जा रहा है कि गोनो अधिकार परिषद के कार्यकर्ताओं ने अंतरिम सरकार प्रमुख द्वारा की गई इस टिप्पणी को समर्थन के तौर पर लिया और इसके बाद ही उन्होंने हिंसा का सहारा लिया। ढाका पुलिस का कहना है कि गोनो अधिकार परिषद के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार शाम जेपी कार्यालय में आग लगा दी। उधर, संगठन के महासचिव राशिद खान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि हमला किसने किया। हालांकि, खान ने यह भी कहा कि जेपी अवामी लीग की सहयोगी है और नरसंहारों में शामिल रही है।
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