फूड इंडस्ट्री का नया तंबाकू संकट!” — अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स बन रहे हैं सेहत के दुश्मन

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में, पैकेज्ड स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स और बर्गर हमारी डाइट का ज़रूरी हिस्सा बन गए हैं। लेकिन, फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी की एक नई रिसर्च स्टडी में चेतावनी दी गई है कि ये अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड धीरे-धीरे स्मोकिंग जितने ही खतरनाक साबित हो रहे हैं। ये शरीर में सूजन बढ़ाते हैं, जिससे दिल की बीमारी, कैंसर और मेंटल बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। एक्सपर्ट इसे फूड इंडस्ट्री का तंबाकू संकट कह रहे हैं। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड वे फूड होते हैं जिनमें आर्टिफिशियल रंग, फ्लेवर, एडिटिव और प्रिजर्वेटिव मिलाए जाते हैं ताकि वे लंबे समय तक चलें, स्वादिष्ट लगें और अपील बनी रहे।
इनमें सॉफ्ट ड्रिंक, बर्गर, पैकेज्ड स्नैक्स, सॉसेज, बिस्कुट, पैकेज्ड जूस और प्रोसेस्ड मीट शामिल हैं। इन फूड में न्यूट्रिएंट्स की कमी होती है और इनमें बहुत ज़्यादा नमक, चीनी और अनहेल्दी फैट होता है। यूनाइटेड स्टेट्स में किए गए एक सर्वे के मुताबिक, ये फूड बड़ों की डाइट का 60% और बच्चों की डाइट का 70% हिस्सा होते हैं। फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी (FAU) की स्टडी में 9,254 अमेरिकी बड़ों की डाइट को एनालाइज़ किया गया। इसमें पाया गया कि जिन लोगों ने अपनी कुल कैलोरी का 60 से 79% अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स से लिया, उनमें हाई-सेंसिटिव C-रिएक्टिव प्रोटीन का लेवल सबसे ज़्यादा था। यह प्रोटीन सूजन का एक मुख्य इंडिकेटर है, जो बदले में दिल की बीमारी, कैंसर और मेटाबोलिक डिसऑर्डर में योगदान देता है।
डॉक्टरों का कहना है कि हाई-सेंसिटिव C-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट दिल की बीमारी और कैंसर के शुरुआती रिस्क फैक्टर्स की पहचान करने के लिए बहुत उपयोगी है। इसके अलावा, लोगों को फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और घर का बना खाना जैसे साबुत और नेचुरल फूड्स खाने चाहिए। यह स्टडी एक कड़ा मैसेज देती है: सुविधा के बदले सेहत की कीमत न चुकाएं। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स कैलोरी तो देते हैं लेकिन न्यूट्रिशन नहीं। इन्हें कम करके और नेचुरल डाइट अपनाने से सूजन कम होगी, जिससे दिल की बीमारी और कैंसर जैसी बीमारियों से बचा जा सकेगा। स्वाद और सुविधा के आकर्षण के पीछे छिपा प्रोसेस्ड फूड्स का जाल हमारे शरीर को अंदर से खत्म कर रहा है।
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