सुरक्षा से स्वराज तक: रक्षा, ऊर्जा और टैक्स सुधारों पर केंद्रित संतुलित बजट

Senior Reporter India | सीमाओं पर बढ़ते तनाव और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच केंद्र सरकार ने रक्षा तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए ₹7.84 लाख करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 15.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। बीते साल रक्षा बजट ₹6.81 लाख करोड़ था, जबकि 2025-26 के लिए संशोधित अनुमान ₹7.32 लाख करोड़ रखा गया था। इस तरह, इस वर्ष वास्तविक बढ़ोतरी करीब ₹52,000 करोड़ की हुई है।
ऊर्जा क्षेत्र में भी सरकार ने संतुलित और भविष्य केंद्रित रणनीति अपनाई है। नए और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए ₹32,914.67 करोड़ का आवंटन किया गया है, जबकि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को ₹24,123 करोड़ दिए गए हैं। सरकार ने 2035 तक परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और सामग्रियों पर कस्टम ड्यूटी में छूट देने का फैसला किया है। इसके साथ ही, लिथियम-आयन सेल निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल और सोलर ग्लास में इस्तेमाल होने वाले सोडियम एंटीमोनेट को भी बेसिक कस्टम ड्यूटी से राहत दी गई है।
सामाजिक क्षेत्र पर भी सरकार का ध्यान बना हुआ है। शिक्षा के लिए ₹1,39,289 करोड़ और ग्रामीण विकास के लिए ₹1,97,023 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे बुनियादी सुविधाओं और रोजगार सृजन को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मनरेगा को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार ने महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल की घोषणा की है। इस नई योजना के तहत खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को केवल सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, बल्कि एक टिकाऊ आर्थिक मॉडल के रूप में विकसित करने पर ज़ोर दिया गया है। यह पहल कपड़ा उद्योग के आधुनिकीकरण से जुड़ी समर्थ 2.0 योजना का हिस्सा है।
टैक्सपेयर्स के लिए राहत की बात यह है कि व्यक्तिगत आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले की तरह ₹12 लाख तक की आय पर टैक्स नहीं देना होगा, साथ ही ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलेगा। इस तरह कुल ₹12.75 लाख तक की आय पूरी तरह टैक्स-फ्री रहेगी।
हालांकि टैक्स सिस्टम में कई संरचनात्मक सुधार किए गए हैं। व्यापारियों और उद्यमियों को राहत देते हुए सरकार ने अघोषित आय के मामलों में जेल की सज़ा की जगह जुर्माने का प्रावधान किया है। अघोषित आय की सीमा बढ़ाकर ₹1 करोड़ कर दी गई है। इसके अलावा, अब लोग छह महीने के भीतर अपनी विदेशी संपत्तियों की घोषणा कर सकेंगे। नया इनकम टैक्स कानून 1 अप्रैल से लागू होगा।
रिटर्न फाइलिंग की समय-सीमा में भी बदलाव किया गया है। व्यक्तिगत करदाताओं को अब 31 जुलाई तक और संस्थागत करदाताओं को 31 अगस्त तक रिटर्न दाखिल करने का समय मिलेगा। संशोधित रिटर्न 31 मार्च तक भरे जा सकेंगे, जबकि गलत जानकारी देने पर 100 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जाएगा।
संघीय ढांचे को मज़बूत करते हुए वित्त मंत्री ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करने की घोषणा की। अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता वाले आयोग ने केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत बनाए रखने की सिफारिश की थी। इसके तहत केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में राज्यों को ₹1.4 लाख करोड़ का अनुदान प्रदान करेगी।
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