UN रिपोर्ट में खुलासा: पहलगाम हमले के पीछे टीआरएफ, पाकिस्तान की संलिप्तता पर वैश्विक मुहर

UN रिपोर्ट में खुलासा: पहलगाम हमले के पीछे टीआरएफ, पाकिस्तान की संलिप्तता पर वैश्विक मुहर: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति ने स्वीकार किया है कि पहलगाम में भारतीय पर्यटकों की नृशंस हत्या के लिए द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ज़िम्मेदार है। यह हमला पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की मदद के बिना संभव नहीं था। परिषद की 1267 प्रतिबंध निगरानी टीम की मंगलवार को जारी 36वीं रिपोर्ट में पहलगाम आतंकी हमले का ज़िक्र है। रिपोर्ट में टीआरएफ और पाकिस्तान का स्पष्ट उल्लेख भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है, जिसने पहलगाम हमले में पड़ोसी देश की संलिप्तता को दुनिया के सामने उजागर किया है। यह जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से राज्य प्रायोजित आतंकवाद पर वैश्विक मुहर लगाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में पाँच आतंकवादियों ने पर्यटकों पर हमला किया था। टीआरएफ ने उसी दिन हमले की ज़िम्मेदारी ली थी। घटनास्थल की तस्वीरें भी जारी की गईं। अगले दिन भी टीआरएफ ने फिर ज़िम्मेदारी ली, लेकिन 26 अप्रैल को उसने अपना दावा वापस ले लिया। इसके बाद टीआरएफ की ओर से कोई और बयान नहीं आया। न ही किसी अन्य समूह ने हमले की ज़िम्मेदारी ली।
1267 प्रतिबंध समिति के सभी निर्णय (निगरानी दल की रिपोर्ट सहित) सुरक्षा परिषद के सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से अपनाए जाते हैं। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि कैसे दुनिया अब पाकिस्तान के झूठ और धोखे के आख्यान को समझ रही है। पाकिस्तान के दोहरे मापदंड और प्रभावी इनकार की रणनीति भी उजागर हुई है। पाकिस्तान अपने जिहादी छद्म संगठनों जैसे टीआरएफ और पीपुल्स अगेंस्ट फासिस्ट फ्रंट को धर्मनिरपेक्ष और आधुनिक नाम देता है। ऐसा लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों से लोगों का ध्यान हटाने और जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाता है। पाकिस्तान का चेहरा पूरी तरह से बेनकाब हो गया है।
सुरक्षा परिषद की यह रिपोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2019 के बाद पहली बार इसमें लश्कर का नाम आया है। रिपोर्ट में एक सदस्य देश के हवाले से कहा गया है, “यह हमला लश्कर के समर्थन के बिना संभव नहीं था। लश्कर और टीआरएफ के बीच संबंध थे।” एक अन्य सदस्य देश ने यह भी कहा कि यह हमला टीआरएफ ने किया था, जो लश्कर का ही दूसरा नाम है। यह पाकिस्तान के इस दावे को खारिज करता है कि टीआरएफ एक स्वतंत्र संगठन है। रिपोर्ट दक्षिण एशिया खंड के अंतर्गत टीआरएफ और पहलगाम हमले का सबसे बड़ा और पहला उल्लेख है। यह भारत के इस दावे की पुष्टि करता है कि टीआरएफ और लश्कर-ए-तैयबा के बीच गहरे संबंध हैं और उन्हें पाकिस्तान से समर्थन मिलता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि क्षेत्रीय संबंध अभी भी नाज़ुक हैं। यह आशंका जताई गई है कि आतंकवादी संगठन इन क्षेत्रीय तनावों का फायदा उठा सकते हैं।
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