2030 तक खतरनाक स्तर पर पहुंच सकता है वैश्विक तापमान, वैज्ञानिकों ने दी बड़ी चेतावनी
IPCC रिपोर्ट के अनुसार तापमान 1.5°C से ऊपर गया तो बढ़ेंगी Heatwave, बाढ़ और सूखे जैसी चरम घटनाएं

Report| नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन को लेकर वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं। Intergovernmental Panel on Climate Change (IPCC) के अनुसार यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन की रफ्तार कम नहीं की गई तो वर्ष 2027 से 2030 के बीच पृथ्वी का औसत तापमान औद्योगिक युग से लगभग 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि वर्तमान दर से ही उत्सर्जन जारी रहा तो 2040 से 2045 के बीच वैश्विक तापमान लगभग 2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इसके अलावा सदी के मध्य तक तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने का भी खतरा जताया गया है।
वैज्ञानिकों के अनुसार Paris Agreement on Climate Change के बाद भी दुनिया ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को प्रभावी ढंग से कम करने में सफल नहीं हो पाई है। कोरोना महामारी के दौरान कुछ समय के लिए उत्सर्जन घटा जरूर, लेकिन उसके बाद फिर से इसमें तेजी देखी गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि पृथ्वी की जलवायु प्रणाली में एक प्रकार की जड़ता होती है। इसका मतलब यह है कि यदि आज से ही कार्बन उत्सर्जन पूरी तरह रोक दिया जाए, तब भी तापमान में बढ़ोतरी का असर लंबे समय तक जारी रह सकता है।
इसका बड़ा कारण महासागर हैं। वैज्ञानिक बताते हैं कि अब तक इंसानों द्वारा पैदा की गई गर्मी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा समुद्रों ने अपने भीतर समेट लिया है। यह ऊष्मा धीरे-धीरे वातावरण को प्रभावित करती रहेगी। साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड गैस भी सैकड़ों वर्षों तक वातावरण में बनी रहती है।
जलवायु वैज्ञानिक और पॉट्सडैम विश्वविद्यालय के निदेशक प्रोफेसर Johan Rockström के अनुसार 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि को भी सुरक्षित स्तर नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक यदि तापमान इस सीमा से ऊपर जाता है तो आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय नुकसान तेजी से बढ़ने लगेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी पर ही फसलों की पैदावार बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा बीमारियों का फैलाव, हीट वेव, सूखा और अत्यधिक वर्षा जैसी घटनाओं से निपटना भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
अगर तापमान 2 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचता है तो दुनिया भर में करोड़ों लोगों को गंभीर आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद केवल 0.5 डिग्री सेल्सियस की अतिरिक्त वृद्धि भी मानव समाज को अनिश्चित और कठिन भविष्य की ओर धकेल सकती है।
वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिरता भी प्रभावित हो रही है। यदि यह स्थिति और बिगड़ी तो कृषि उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने पर घातक Heatwave, बाढ़, अत्यधिक बारिश, शहरों में जलभराव, जंगलों में आग, ग्लेशियर झील फटना, सूखा और तूफान जैसी चरम मौसम घटनाएं ज्यादा बार और ज्यादा तीव्रता से सामने आ सकती हैं।
इसके परिणामस्वरूप फसलों की पैदावार घट सकती है, स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है और मच्छरों, पानी व भोजन से फैलने वाली बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाएगा। पीने के पानी की कमी, बड़े पैमाने पर पलायन और सामाजिक तनाव जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया तो कई क्षेत्रों में सामान्य जीवन जीना कठिन हो सकता है और लोगों के सामने केवल जीवित रहने की चुनौती ही बच सकती है।
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