भक्त को परेशानी में देखकर भगवान स्वयं आये

मोटिवेशन / प्रेरणा : संत श्री रूपकला जी एक महान संत थे। जिस आश्रम में वे रहते थे, वहाँ के नियमों का उन्होंने पूरी निष्ठा से पालन किया। तीस रुपये मासिक वेतन वाली साधारण नौकरी से शुरुआत करके, उन्होंने अपनी योग्यता, कार्यकुशलता और बुद्धिमत्ता से तीन सौ रुपये तक का सफ़र तय किया। लगभग तीस वर्षों तक बिहार के शिक्षा विभाग में ज़िम्मेदार पदों पर कार्य करते हुए, वे आध्यात्मिक प्रगति करते रहे। कार्य के साथ-साथ वे ईश्वर का नाम जपते रहते थे। इसी भक्ति के कारण, उनके इष्टदेव की विशेष कृपा उन पर बनी रही और आश्चर्यजनक रूप से, उन्हें सभी कठिनाइयों में ईश्वर का सहयोग प्राप्त हुआ।
एक बार संत श्री रूपकला जी को अपना ऋण चुकाने के लिए धन की सख्त आवश्यकता थी। उन्होंने कई परिचितों और रिश्तेदारों से मदद माँगी, लेकिन किसी ने उन्हें एक पैसा भी नहीं दिया। निराश होकर उन्होंने मन ही मन कहा, ‘हे ईश्वर, अब मैं सब कुछ आप पर छोड़ता हूँ।’ उसी शाम, एक अनजान व्यक्ति आया, सबके सामने उसने उनके हाथ में एक लिफ़ाफ़ा दिया और कहा, ‘मुझे आपसे बात करनी है, इसे अभी रख लीजिए, मैं जल्द ही आऊँगा।’ वह व्यक्ति फिर वापस नहीं लौटा। बाद में जब उसने लिफाफा खोला, तो उसमें ठीक उतने ही पैसे थे जितने की उसे ज़रूरत थी। इससे लोगों को समझ में आया कि भगवान स्वयं अपने भक्त की मदद करने आते हैं।
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