भगवान नियमों से नहीं, सच्ची भक्ति से मिलते हैं—एकादशी की यह कथा दिल छू लेगी

एक राज्य में एक बहुत ही धार्मिक, न्यायप्रिय और दयालु राजा राज करता था। उसके राज्य में यह नियम था कि एकादशी के दिन कोई भी अनाज नहीं खाएगा। राजा से लेकर आम लोगों तक, सभी उपवास रखते थे, फल खाते थे और भगवान विष्णु की पूजा करते थे। एक दिन, दूसरे राज्य से एक आदमी नौकरी की तलाश में राजा के दरबार में आया। राजा ने उसे नौकरी दे दी और बताया कि एकादशी के दिन अनाज खाना मना है। जब पहली एकादशी को उसे दूध और फल दिए गए, तो न तो उसकी भूख मिटी और न ही उसका मन भरा। उसने राजा से अनाज खाने की इजाज़त मांगी।
राजा ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन आखिर में उसे अपनी मर्ज़ी से अनाज खाने की इजाज़त दे दी। वह आदमी नदी के किनारे गया, नहाया और अनाज पकाकर, प्यार से भगवान विष्णु को पुकारा। उसकी सच्ची पुकार सुनकर, भगवान खुद प्रकट हुए और उसके साथ खाना खाया। अगली एकादशी को, उस आदमी ने राजा से दुगना अनाज मांगा, यह कहते हुए कि पिछली बार भगवान भी उसके साथ खाने आए थे। यह सुनकर राजा हैरान रह गया और उसके साथ गया। इस बार भी, भगवान प्रकट हुए और उस आदमी को अपने साथ वैकुंठ ले गए। यह देखकर राजा समझ गया कि भगवान नियमों से नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम और भक्ति से मिलते हैं। उस दिन से राजा ने सच्चे दिल से भक्ति करना शुरू कर दिया और अपने जीवन को धन्य बनाया।
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