सोने की चमक पड़ी महंगी: SGB पर टैक्स नियम बदले, सेकेंडरी निवेशकों को बड़ा झटका

Senior Reporter India | 🔶 सोने की कीमतों ने सरकार की बढ़ाई चिंता, SGB पर टैक्स नियम बदले
SBI रिसर्च की रिपोर्ट “द ग्रेट ग्लोबल गोल्ड रश” के मुताबिक, सोने की कीमतों में ज़बरदस्त उछाल के चलते सरकार को सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना में अब तक करीब ₹93,284 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर गोल्ड के दाम इसी रफ्तार से बढ़ते रहे, तो सरकारी खजाने पर यह बोझ और बढ़ सकता है।
असल में जब निवेशकों ने SGB में पैसा लगाया था, उस समय सोने की कीमतें काफी नीचे थीं। अब जब बॉन्ड मैच्योर हो रहे हैं, तो गोल्ड की कीमत कई गुना बढ़ चुकी है। ऐसे में सरकार को निवेशकों को ऊंची दर पर भुगतान करना पड़ रहा है, जिससे हजारों करोड़ रुपये का घाटा सामने आया है।
🔶 सेकेंडरी मार्केट से SGB खरीदने वालों को झटका
अब तक निवेशक स्टॉक एक्सचेंज (सेकेंडरी मार्केट) से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदकर मैच्योरिटी पर टैक्स-फ्री मुनाफे का फायदा उठा रहे थे। लेकिन 1 अप्रैल 2026 के बाद यह सुविधा पहले जैसी नहीं रहेगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में साफ कर दिया है कि अब SGB पर कैपिटल गेन टैक्स छूट सभी निवेशकों को नहीं मिलेगी। खास तौर पर एक्सचेंज से बॉन्ड खरीदने वालों के लिए यह एक बड़ा झटका है।
🔶 टैक्स छूट पाने के लिए अब तीन ज़रूरी शर्तें
अब SGB पर टैक्स-फ्री कैपिटल गेन का फायदा सिर्फ उन्हीं निवेशकों को मिलेगा जो इन तीन शर्तों को पूरा करते हैं—
- निवेशक एक व्यक्तिगत (Individual) निवेशक होना चाहिए।
- बॉन्ड को RBI द्वारा जारी किए जाने के समय सीधे सब्सक्राइब किया गया हो।
- बॉन्ड को पूरी अवधि (8 साल) तक अपने पास रखा गया हो।
सरल शब्दों में, अगर आपने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सीधे सरकार से जारी होते समय खरीदा है और मैच्योरिटी तक होल्ड किया है, तो पहले की तरह आपका मुनाफा टैक्स-फ्री रहेगा। लेकिन अगर आप सेकेंडरी मार्केट से बॉन्ड खरीदते हैं और मूल सब्सक्राइबर नहीं हैं, तो मैच्योरिटी पर होने वाले गेन पर टैक्स देना होगा।
🔶 सरकार क्यों लाई यह बदलाव?
सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद SGB निवेशकों की पसंद बन गए हैं, लेकिन इससे सरकार को भारी नुकसान हो रहा है। सरकार चाहती है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड एक लॉन्ग-टर्म सेविंग इंस्ट्रूमेंट बने रहें, न कि शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग और आर्बिट्रेज का ज़रिया।
इसलिए बजट में यह साफ संदेश दिया गया है कि टैक्स छूट का लाभ उन्हीं निवेशकों को मिलेगा जो देश की अर्थव्यवस्था में लंबे समय तक भरोसा दिखाते हैं, न कि बार-बार खरीद-फरोख्त करने वालों को।
सरकार ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि RBI द्वारा जारी सभी SGB पर टैक्स छूट का नियम एक समान होगा, ताकि अलग-अलग बॉन्ड सीरीज़ को लेकर कोई भ्रम न रहे।
🔶 निवेशकों के लिए क्या मायने?
सोने की बढ़ती कीमतों के बीच SGB अब भी एक आकर्षक निवेश विकल्प हैं, लेकिन टैक्स का फायदा अब केवल प्राइमरी इन्वेस्टर्स तक सीमित रहेगा। अगर आप स्टॉक एक्सचेंज से SGB खरीदने की सोच रहे हैं, तो नए टैक्स नियमों को ध्यान में रखकर ही निवेश का फैसला करना होगा।
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