प्रेरणा

कैसे चुने सही कैरियर

  Motivation| प्रेरणा:  किसी भी व्यक्ति के जीवन में दो घटनाएँ – अत्यधिक महत्त्व रखती हैं- पहली वह किस – परिवार में जन्म लेता है और दूसरी वह किस – कैरियर में प्रवेश करता है। पहली घटना पर उसका कोई नियंत्रण नहीं होता, परंतु दूसरी को वह काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।

जन्म का व्यक्ति की सफलता और ख्याति से कोई सीधा संबंध नहीं है। सफल और संपन्न परिवार में जन्मे बच्चों को अन्य की तुलना में अनेक लाभ होते हैं। अब दूसरी घटना को लिया जाए। कैरियर यानी जीविकार्जन के लिए हम किस व्यवसाय को अपनाएँगे, यह हमारे जीवन का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण विषय है, जो बहुत सीमा तक हमारे हाथ में होता है। प्रत्येक व्यक्ति को यह अहम फैसला स्वयं ही करना होता है। हालाँकि वह इसमें अनेक लोगों से सलाह ले सकता है।

      कैरियर का चुनाव यदि इतना महत्त्वपूर्ण है तो कैसे इसको चुना जाए, जिससे कि व्यक्ति को अधिकतम लाभ मिल सके। इस संबंध में काउंसलिंग से बहुत फायदा होता है, परंतु कठिनाई यह है कि इसके लिए सही व्यक्ति मिलना एक समस्या है। इसकी कमी को देखते हुए इस समय कैरियर काउंसलिंग करने वालों की बाढ़ सी आई हुई है, लेकिन इसमें अधिकतर अनभवी कम हैं। वास्तव में ये सब सूचना केंद्र हैं, सलाहकार नहीं। ये केंद्र यह तो बता सकते हैं कि क्या-क्या कैरियर उपलब्ध हैं, परंतु हमको किस कैरियर में जाना चाहिए या कौन-सा कैरियर हमको सबसे अधिक सफलता प्रदान कर सकता है, यह बताना उनके लिए कठिन है

                   तो कौन कर सकता है हमारी समस्या का समाधान ? कैरियर गाइड सबसे पहले तो हमारे माता-पिता हैं, जो हमको बचपन से देखते-समझते आ रहे हैं। उनको पता होता है हमारी कमजोरियाँ क्या हैं और हम किन कामों को ज्यादा अच्छी तरह कर सकते हैं। सामान्यतः पिता यह चाहते हैं कि हम उनके व्यवसाय को अपनाएँ।

इस बात से उन्हें गर्व महसूस होता है कि उनका पुत्र या पुत्री उनके ही नक्शेकदम पर चल रहा है। इसमें कोई हर्ज भी नहीं है, क्योंकि वातावरण का लाभ तो मिलता ही है। वातावरण से हम वह सब सीख सकते हैं, जो कोई स्कूल नहीं सिखा

सकता।

यदि हमारी रुचि पिता के व्यवसाय में है, तो उसे अपनाने में ज्यादा सोचना नहीं चाहिए, लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि उस व्यवसाय के लिए हमारे अंदर वह योग्यता या इच्छा नहीं होती, जो हमारे माता-पिता में होती है।

अक्सर यह भी होता है कि घर में पिता या माँ को अपने कैरियर के बारे में इतनी घृणा हो जाती है कि वे हमेशा कहते हैं कि बेटे या बेटी को इसमें नहीं जाने देंगे।

अक्सर फौज या पुलिस में काम करने वाले ऐसा कहते हैं। इससे बच्चों के मन में उस कैरियर के बारे में अरुचि उत्पन्न हो जाती है। वास्तव में दोनों ही स्थितियाँ उचित नहीं हैं।

माता-पिता को घर में किसी भी कैरियर के बारे में कोई अंतिम राय नहीं बनानी चाहिए। घर में ऐसा माहौल होना चाहिए कि विभिन्न कैरियर के बारे में समाधानपरक बातचीत हो। सबकी – अच्छाइयाँ और बुराइयाँ खोजी जानी चाहिए। बच्चों – को उनके लाभ और हानियाँ पता होने चाहिए।

यदि ऐसा वातावरण बनाया जाए, तो बच्चों को एक तार्किक निर्णय लेने में सहायता मिलती है। दूसरे सहायता केंद्र परिवार के मित्रगण होते हैं। वास्तव में प्रत्येक परिवार को एक विस्तृत घेरा बनाना चाहिए, जिसमें विभिन्न व्यवसायों के व्यक्ति हों।

इससे बच्चों को हर कैरियर की जानकारी मिलती है, उनके कार्यकलापों के बारे में पता चलता है, उनके अच्छे-बुरे पहलुओं को देखने का मौका मिलता है और एक विस्तृत सूचना आधार बन जाता है।

यदि ऐसा नहीं होता तो बच्चे भटकते रहते हैं, क्योंकि उन्हें केवल एक ही प्रकार के कैरियर और जीवन की जानकारी मिलती है। तीसरा सहायता केंद्र स्कूल व कॉलेज होता है, जहाँ जीवन के प्रारंभ के 15 से 20 वर्ष गुजरते हैं।

यहाँ वे शिक्षकों के प्रभाव में आते हैं, जो उनके व्यक्तित्व को गढ़ते हैं। इसके अतिरिक्त वे बच्चों की योग्यता को वास्तव में पहचानते हैं। शिक्षकों से अधिक बच्चों का मित्र समुदाय महत्त्वपूर्ण होता है। प्रयत्न यह होना चाहिए कि इस ग्रुप में विभिन्न व्यवसायों के परिवारों के बच्चे हों। इससे बच्चों को कई तरह के वातावरण के बारे में जानकारी मिलती है।

चौथा सहायता केंद्र होता है पत्रिकाएँ, अखबार व पुस्तकें। इनमें विभिन्न प्रकार के समाचार व लेख पढ़ने को मिलते हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न व्यवसाय से संबंधित शिक्षा केंद्रों के विज्ञापन निकलते रहते हैं। उनसे पता चलता रहता है कि

कहाँ-कहाँ पर किस प्रकार के शिक्षा के केंद्र हैं। सामान्यतः दसवीं कक्षा में आने पर ही माता पिता कैरियर के बारे में सोचना प्रारंभ करते हैं। तब तमाम सूचनाएँ एकत्र की जाती हैं, मित्रों से बातचीत की जाती है और इधर-उधर भाग-दौड़कर महीनों में ही तय किया जाता है कि कौन-सा कैरियर

अपनाया जाए, लेकिन यह गलत है। वास्तव में कैरियर के बारे में तो काफी जल्दी

सोचना प्रारंभ कर देना चाहिए। बारह वर्ष की आयु तक माता-पिता को काफी कुछ सोच लेना चाहिए कि कौन-कौन से कैरियर बच्चे के लिए उपयुक्त हो सकते हैं। केवल एक कैरियर के बारे में ही नहीं सोचना चाहिए। यह अत्यधिक प्रतियोगिता का युग है, इसलिए वैकल्पिक कैरियर संभावना के बारे में पहले से ही सोचकर तैयार रहना चाहिए।

होता यह है कि यदि बच्चे को किसी अच्छी संस्था में प्रवेश नहीं मिल पाता, तो उसको किसी साधारण संस्था में भेज दिया जाता है। दो-तीन साल प्रशिक्षण लेने के बाद भी उसको अच्छी नौकरी नहीं मिल पाती। अगर वे ऐसे कार्यक्रम में प्रवेश की अपेक्षा अपनी रुचि के किसी दूसरे कोर्स को चुनते, तो वे सफल होते।

किसी भी कैरियर का चुनाव करते समय यह ध्येय होना चाहिए कि उसमें नंबर एक की स्थिति प्राप्त की जाए। इसके लिए चार बातों पर ध्यान देना होता है- रुचि, योग्यता, प्रशिक्षण और व्यक्तिगत विशेषताएँ।

इनमें रुचि बहुत ही महत्त्वपूर्ण तत्त्व है, जो किसी भी कैरियर में सफल होने के लिए आवश्यक है। हम किसी भी व्यवसाय को चुनें, सफलता तब तक हमारे कदम नहीं चूमेगी, जब तक हम प्रवीणता हासिल नहीं कर लेते।

इसके लिए आवश्यक है कि हम अपने व्यवसाय की बारीकियों को समझें, उसमें हो रहे आधुनिक विकास के बारे में जानकारी रखें और अपना कार्य इस प्रकार करें कि प्रत्येक उससे खुश हों। यह तभी संभव है, जब हमें अपने काम में रुचि होगी। रुचियाँ व्यक्तिगत होती हैं।

                    यदि हम और हमारे निकटतम संबंधी हमारी रुचियों को ठीक प्रकार से समझ पाएँ, तो न केवल हम एक ठीक कैरियर का चुनाव कर पाएँगे, बल्कि उसमें अधिकतम सफलता भी प्राप्त कर सकेंगे।

योग्यता आज के युग में सबसे महत्त्वपूर्ण तथ्य है। कम ही बच्चों में जन्मजात योग्यता पाई जाती है। अधिकतर लोगों को यह स्वयं ही विकसित करनी पड़ती है। इसलिए जिस कैरियर में जाना हो, उससे संबंधित योग्यताएँ प्रारंभ से ही विकसित करनी चाहिए, जो बच्चे आईआईटी की तैयारी दसवीं से ही प्रारंभ करते हैं, वे आसानी से सफलता प्राप्त कर लेते हैं।

भाषा का अच्छा ज्ञान, स्वयं को अभिव्यक्त करने की क्षमता, तर्कपूर्ण तरीके से सोचना, सिद्धांतों को व्यवहार में प्रयोग करना, कई तथ्यों को साथ रखकर सोचना और समाधान निकालना इस प्रकार की अनेक योग्यताएँ हैं, जो बचपन से ही विकसित की जा सकती हैं। प्रशिक्षण योग्यता के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण बात है प्रशिक्षण की। प्रशिक्षण हमारी योग्यता को निखार देता है।

यह बात दूसरी है कि स्वयं के व्यापार में बिना प्रशिक्षण प्रवेश पाया जा सकता है, परंतु यहाँ भी पिता या रिश्तेदार के साथ काम करते हुए स्वतः ही प्रशिक्षण हो जाता है, लेकिन अगर व्यवसाय का प्रशिक्षण किसी उच्चकोटि के संस्थान से लिया जाए, तो बेहतर होता है।

      व्यक्तिगत विशेषताएँ प्रत्येक व्यक्ति की अपनी विशेषताएँ होती हैं। कुछ लोग किसी बात को जल्दी समझ जाते हैं, तो कुछ लोगों को बार-बार समझाने पर भी समझ नहीं आता। कुछ लोग अपनी बात अच्छी तरह कह पाते हैं, बातों की तह तक पहुँच जाते हैं और कुछ लोग बोल ही नहीं पाते। इस प्रकार के व्यक्तिगत अंतर सामान्यतः देखने

को मिल जाते हैं। कैरियर की सफलता के लिए जरूरी है कि हमारी व्यक्तिगत विशेषताओं का कैरियर के साथ उचित तालमेल हो। जरूरी है आत्मचिंतन। यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि कैरियर काउंसलिंग एक डॉक्टर के पास जाने जैसा नहीं है कि बीमारी हुई और पता चल गया कि क्या दवाई लेनी है।

कैरियर का चयन करना है तो आत्मचिंतन करना या अपने आप को जानना ही होगा। कैरियर से संबंधित विभिन्न पहलुओं के बारे में जितना पता किया जाए और जितनी जानकारी ली जाए, अच्छा है, परंतु फैसला तो हमको ही करना होगा; क्योंकि कैरियर चुनने के सही और गलत परिणाम तो हमको ही भुगतने पड़ेंगे, किसी और को नहीं। कैरियर चयन के संबंध में अपनी रुचि, क्षमता को विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसके बाद कुशलता एवं कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है। यदि इन मानदंडों में हम खरे उतर रहे हैं तो ही उनका चयन करना चाहिए।

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