ब्रिटेन में वीजा विस्तार में भारतीय आगे, लेकिन Immigration नीति पर उठे सवाल

Report. लंदन से जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक ब्रिटेन में वीजा अवधि बढ़वाने वालों में भारतीय छात्र और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवर अब भी सबसे आगे हैं। हालांकि, कुल मिलाकर प्रवासी कर्मियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। यह जानकारी Home Office द्वारा जारी ताजा Migration डेटा से सामने आई है।
ब्रिटेन स्थित Work Rights Centre (WRC) ने इन आंकड़ों पर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि प्रवासन कम करने की मौजूदा सरकारी नीति से स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अन्य आवश्यक क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। डब्ल्यूआरसी ने खासतौर पर नर्सों, थेरेपिस्टों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों और कुशल कारीगरों की संख्या में आई कमी को गंभीर बताया है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, स्नातकोत्तर मार्ग के तहत वीजा विस्तार में नए वर्ष में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसका एक कारण आश्रितों को साथ लाने के नियमों में सख्ती को माना जा रहा है। डब्ल्यूआरसी की सीईओ डॉ. डोरा-ओलिविया विकोल ने कहा कि सरकार को ऐसी आव्रजन व्यवस्था बनानी चाहिए जो श्रमिकों और सार्वजनिक सेवाओं की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हो। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विदेशी नर्सों की संख्या में 93 प्रतिशत की गिरावट ऐसे समय में चिंता का विषय है, जब देश में करीब 25 हजार नर्सिंग पद रिक्त हैं।
संगठन ने यह भी कहा कि ब्रिटेन आने वाले कई प्रवासी कामगारों को ऊंची फीस, स्थायी निवास की लंबी प्रक्रिया और नियोक्ता-आधारित वीजा शर्तों के कारण शोषण का सामना करना पड़ता है।
हालांकि, विदेशी छात्रों को दिए जाने वाले प्रायोजित अध्ययन वीजा में पिछले वर्ष की तुलना में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में भारतीय नागरिकों को 95,231 छात्र वीजा प्रदान किए गए। वहीं, कुशल कामगार वीजा विस्तार के मामलों में भी भारतीयों की संख्या सबसे अधिक रही। स्वास्थ्य क्षेत्र में 1,04,555 भारतीय पेशेवरों के वीजा की अवधि बढ़ाई गई।
शरण मांगने वालों के आंकड़ों में 2025 के दौरान 4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। छोटी नावों के जरिए अवैध प्रवेश के मामलों में 13 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। शरण आवेदन के मामलों में भारतीय सातवें स्थान पर रहे, जबकि पाकिस्तान शीर्ष 10 देशों में शामिल रहा।
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