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वैश्विक तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, Fitch ने बढ़ाया ग्रोथ अनुमान

पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी रहने के बावजूद मजबूत घरेलू मांग और निवेश के कारण भारत की Economy के लिए सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।

Report| नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर एक सकारात्मक आकलन सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी Fitch Ratings ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को पहले से अधिक कर दिया है।

एजेंसी के नए अनुमान के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वृद्धि दर लगभग 7.5 प्रतिशत रह सकती है, जबकि 2026-27 के लिए यह 6.7 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इससे पहले दिसंबर में एजेंसी ने 2025-26 के लिए 7.4 प्रतिशत और 2026-27 के लिए 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान जताया था।

शुक्रवार को जारी अपनी Global Economic Outlook Report में फिच ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के बावजूद भारत की मजबूत घरेलू मांग और उपभोक्ता गतिविधियों के कारण आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाया गया है।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि 2026-27 की पहली छमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि कुछ धीमी पड़ सकती है। इसका कारण बढ़ती तेल कीमतों से उत्पन्न महंगाई का दबाव बताया गया है, जिससे आम लोगों और कंपनियों की आय पर असर पड़ सकता है तथा उपभोक्ता खर्च की गति सीमित हो सकती है।

मौजूदा वित्त वर्ष में उपभोक्ता खर्च में लगभग 8.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि निवेश में करीब 6.9 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यह संकेत देता है कि आर्थिक गतिविधियां अभी भी मजबूत बनी हुई हैं।

महंगाई पर भी नजर

रिपोर्ट के अनुसार हाल के महीनों में महंगाई दर में फिर से हल्की बढ़ोतरी देखी जा रही है। फरवरी में मुद्रास्फीति करीब 3.21 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि दिसंबर 2025 में यह केवल 1.2 प्रतिशत तक आ गई थी।

फिच का अनुमान है कि दिसंबर 2026 तक महंगाई धीरे-धीरे बढ़कर लगभग 4.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो महंगाई उम्मीद से अधिक तेज़ी से बढ़ सकती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष की शुरुआत में आर्थिक गतिविधियों में थोड़ी मंदी के संकेत मिले हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी काफी लचीली बनी हुई है। बैंकिंग क्षेत्र में ऋण वृद्धि अब भी दहाई अंकों में जारी है, जो आर्थिक गतिविधियों की मजबूती का संकेत देता है।

वैश्विक स्तर पर फिच ने 2026 के लिए लगभग 2.6 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। यह आकलन इस धारणा पर आधारित है कि पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में बहुत बड़ा और लंबे समय तक चलने वाला उछाल नहीं आएगा। एजेंसी के मुताबिक औसत वार्षिक कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने की संभावना है।

फिच के मुख्य अर्थशास्त्री Brian Coulton ने कहा कि यदि तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचकर लंबे समय तक वहीं बनी रहती हैं, तो यह वैश्विक आपूर्ति और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

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