INS अरावली: भारत की समुद्री सुरक्षा का नया अध्याय

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के गुरुग्राम स्थित नए नौसैनिक अड्डे आईएनएस अरावली को नौसेना में शामिल कर लिया गया है। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी की उपस्थिति में इसे औपचारिक रूप से शामिल किया गया। इस नए नौसैनिक अड्डे के साथ, भारत दुनिया भर के समुद्रों पर कड़ी नज़र रख सकेगा। नौसेना की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि आईएनएस अरावली का नाम अटल अरावली पर्वत श्रृंखला से लिया गया है। यह नौसेना के विभिन्न सूचना एवं संचार केंद्रों को सहायता प्रदान करेगा, जो नौसेना की कमान, नियंत्रण और समुद्री डोमेन जागरूकता (एमडीए) प्रणाली के लिए आवश्यक है।
अरावली का आदर्श वाक्य ‘समुद्र सुरक्षाम्: सहयोग’ अर्थात ‘सहयोग के माध्यम से समुद्री सुरक्षा’ है। इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि यह नया अड्डा न केवल प्रौद्योगिकी का एक बड़ा केंद्र होगा, बल्कि समुद्र में हमारे प्लेटफार्मों और साझेदारों को जोड़ने का केंद्र बिंदु भी होगा। यह हिंद महासागर क्षेत्र में एक पसंदीदा सुरक्षा साझेदार के रूप में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा।हिंद महासागर क्षेत्र भारत के लिए सामरिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। दुनिया का 70% से अधिक समुद्री तेल व्यापार यहीं होता है। साथ ही, लगभग 50% वैश्विक व्यापार इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। यही वह क्षेत्र है जहाँ चीन का नौसैनिक विस्तार भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। इसलिए, इस क्षेत्र की स्थिरता भारत की आर्थिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
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