विश्व

ईरान-इस्राइल संघर्ष तेज, खाड़ी देशों तक फैले हमले से बढ़ा वैश्विक तनाव

मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच कई देशों में तेल संकट की आशंका, कई सरकारों ने ईंधन बचाने के लिए कड़े कदम उठाए।

Report | दुबई/तेहरान/तेल अवीव। मध्य पूर्व में जारी तनाव अब और गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। ईरान ने मंगलवार को इस्राइल के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र के कई देशों पर भी हमले तेज कर दिए। रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने मिसाइल और Drone Attack के जरिए इस्राइल, बहरीन, सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के कई इलाकों को निशाना बनाया।

इन हमलों में इस्राइल में 190 से अधिक लोग घायल होने की खबर है। इसके अलावा ईरान ने इराक में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने को भी निशाना बनाया। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध खत्म करने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान ने कहा कि संघर्ष कब समाप्त होगा, इसका फैसला वही करेगा।

उधर इस्राइल ने भी जवाबी कार्रवाई जारी रखी है। इस्राइली सेना ने लेबनान में हिजबुल्ला से जुड़े सैन्य अड्डों और हथियार भंडारों पर फिर से हवाई हमले किए हैं।

बहरीन के अधिकारियों के मुताबिक ईरान के हमले में राजधानी मनामा की एक रिहायशी इमारत प्रभावित हुई, जिसमें 29 साल की एक महिला की मौत हो गई और कई अन्य लोग घायल हुए। सऊदी अरब ने भी बताया कि उसके पूर्वी तेल क्षेत्र की ओर दो ड्रोन भेजे गए थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने समय रहते नष्ट कर दिया।

कुवैत के नेशनल गार्ड ने भी दावा किया है कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में घुसे छह ड्रोन को मार गिराया। वहीं संयुक्त अरब अमीरात के औद्योगिक शहर रुवैस में एक पेट्रोकेमिकल संयंत्र के पास ड्रोन हमले के बाद आग लगने की सूचना मिली है।

इन घटनाओं का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। पाकिस्तान में बढ़ते तेल संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सरकारी खर्चों में कटौती के कई फैसले किए हैं।

सरकार ने मंत्रियों और अधिकारियों के विदेश दौरे फिलहाल रोक दिए हैं। इसके अलावा मंत्रियों ने दो महीने तक वेतन न लेने का फैसला किया है, जबकि सांसदों की सैलरी में लगभग 25 प्रतिशत कटौती की जाएगी। ईंधन बचाने के लिए सरकारी वाहनों के इस्तेमाल पर भी सख्ती की गई है और कई वाहनों को अस्थायी रूप से बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

पाकिस्तान में सार्वजनिक और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की संख्या सीमित करने तथा स्कूल-कॉलेज कुछ समय के लिए बंद रखने जैसे कदम भी उठाए गए हैं।

दूसरी ओर थाईलैंड की सरकार ने ईंधन की बचत के लिए सरकारी कर्मचारियों को Work From Home करने की अनुमति दे दी है। वियतनाम ने भी नागरिकों से निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करने और घर से काम करने की अपील की है। वहीं बांग्लादेश पहले ही ऊर्जा संकट को देखते हुए विश्वविद्यालयों को बंद करने और छुट्टियों की अवधि बढ़ाने की घोषणा कर चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों, इस्राइल और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों को निशाना बनाकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उसका उद्देश्य अमेरिका और इस्राइल पर अपने खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए दबाव बनाना माना जा रहा है।

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