क्या काला तिल सच में सुपरफूड है या सिर्फ सोशल मीडिया का नया हेल्थ ट्रेंड?
Black Sesame के फायदे को लेकर इंटरनेट पर कई दावे किए जा रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं – जानिए सच्चाई।

आजकल Black Sesame यानी काला तिल अपने गहरे रंग और हल्के अखरोट जैसे स्वाद की वजह से तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। सोशल मीडिया पर इसे एक नए हेल्थ ट्रेंड के रूप में पेश किया जा रहा है। कई पोस्ट में दावा किया जाता है कि काला तिल सफेद तिल की तुलना में ज्यादा फायदेमंद होता है। कुछ लोग कहते हैं कि यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, दिल की बीमारियों का खतरा कम करने और यहां तक कि सफेद बालों की समस्या को भी कम करने में मदद कर सकता है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या काला तिल वास्तव में इतना चमत्कारी है या यह सिर्फ एक और वायरल हेल्थ ट्रेंड है? कुछ साल पहले Matcha ग्रीन टी भी इसी तरह चर्चा में आई थी और उसे कई स्वास्थ्य लाभों से जोड़ा गया था।
काला तिल क्या है और इसमें क्या होता है?
तिल के बीज मुख्य रूप से तीन रंगों में पाए जाते हैं – सफेद, पीले और काले। एशियाई देशों में इनका उपयोग सदियों से खाना बनाने में किया जाता रहा है। आज भी तिल का इस्तेमाल नमकीन और मीठे दोनों प्रकार के व्यंजनों में किया जाता है।
तिल प्रोटीन का अच्छा स्रोत है और इसमें वसा की मात्रा काफी अधिक होती है, लगभग 50 से 64 प्रतिशत तक। इसी कारण तिल का तेल भी काफी मूल्यवान माना जाता है।
काले और सफेद तिल के पोषण तत्वों में कुछ अंतर जरूर होता है। काले तिल में सामान्य तौर पर फैट, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट थोड़ा अधिक पाया जाता है। इसके साथ-साथ इसमें कुछ विटामिन और मिनरल भी अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकते हैं।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि पोषण संबंधी आंकड़े आमतौर पर 100 ग्राम के आधार पर दिए जाते हैं, जो रोजमर्रा के भोजन में आमतौर पर खाई जाने वाली मात्रा से काफी ज्यादा है।
खाने में तिल का इस्तेमाल
अधिकतर लोग तिल को स्टर-फ्राई, सब्जियों, करी या ब्रेड पर गार्निश के रूप में इस्तेमाल करते हैं। कुछ संस्कृतियों में तिल का उपयोग मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में मुख्य सामग्री के रूप में भी किया जाता है, जैसे हलवा, बिस्कुट, ताहिनी पेस्ट और तिल के लड्डू या बार।
एंटी-न्यूट्रिएंट्स की मौजूदगी
तिल में कुछ प्राकृतिक तत्व भी होते हैं जिन्हें एंटी-न्यूट्रिएंट्स कहा जाता है। इनमें ऑक्सालिक एसिड और फाइटिक एसिड शामिल हैं। ये तत्व शरीर में आयरन, कैल्शियम और जिंक जैसे मिनरल के अवशोषण को थोड़ा कम कर सकते हैं।
हालांकि सामान्य मात्रा में तिल का सेवन करने से अधिकतर लोगों को कोई समस्या नहीं होती। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को पहले से किसी मिनरल की कमी है, तो अधिक मात्रा में तिल खाना उचित नहीं माना जाता।
एंटीऑक्सीडेंट और काला तिल
हमारे शरीर में रोजमर्रा की प्रक्रियाओं के दौरान फ्री रेडिकल्स बनते हैं। ये ऐसे अणु होते हैं जो कोशिकाओं, प्रोटीन और डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
तिल में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो इन फ्री रेडिकल्स के असर को कम करने में मदद करते हैं।
कुछ शोधों में पाया गया है कि काले तिल में सफेद तिल की तुलना में फिनोल नामक एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा हो सकते हैं। इसके अलावा इसमें लिग्नान नामक कंपाउंड भी अधिक पाया जाता है।
लिग्नान का एक प्रमुख प्रकार सेसमिन है, जिस पर कई प्रयोगशाला और पशु अध्ययन किए गए हैं। इन अध्ययनों में इसके एंटीऑक्सीडेंट गुणों के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को कम करने की संभावित क्षमता पर भी चर्चा की गई है।
हालांकि केवल एंटीऑक्सीडेंट की अधिक मात्रा होने का मतलब यह नहीं है कि वह भोजन स्वतः ही स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक लाभकारी साबित होगा।
क्या काला तिल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है?
कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में तिल के संभावित स्वास्थ्य लाभों की जांच की गई है। एक रिव्यू में कुल 465 लोगों पर की गई छह स्टडी के परिणामों को शामिल किया गया। इसमें तिल के बीज, तेल या कैप्सूल के रूप में इसके सेवन का असर देखा गया।
इस विश्लेषण में पाया गया कि तिल के सेवन से बॉडी मास इंडेक्स, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल में थोड़ी कमी देखी गई।
लेकिन इन अध्ययनों की सीमाएं भी थीं। कई स्टडी में प्लेसिबो कंट्रोल नहीं था और कुछ प्रतिभागी पहले से दवाएं ले रहे थे। इसलिए शोधकर्ताओं ने इन परिणामों को कम गुणवत्ता के प्रमाण माना और इससे कोई निश्चित स्वास्थ्य सलाह देने से परहेज किया।
एक अध्ययन में विशेष रूप से काले तिल के कैप्सूल का उपयोग किया गया। चार सप्ताह तक प्रतिदिन लगभग 2.5 ग्राम लेने पर हल्के उच्च रक्तचाप वाले लोगों में सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में थोड़ी कमी देखी गई।
क्या काला तिल सफेद बालों को काला कर सकता है?
इंटरनेट पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि काला तिल खाने से सफेद बाल दोबारा काले हो सकते हैं। लेकिन फिलहाल ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है जो इस दावे को सही ठहराता हो।
दरअसल अभी तक ऐसा कोई विशेष भोजन या सप्लीमेंट साबित नहीं हुआ है जो सफेद बालों को पूरी तरह से उलट सके।
एलर्जी का खतरा
तिल से एलर्जी भी हो सकती है। दुनिया भर में लगभग 0.1 से 0.9 प्रतिशत लोगों में तिल से एलर्जी पाई जाती है और यह संख्या धीरे-धीरे बढ़ती दिख रही है।
एलर्जी के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में एनाफिलेक्सिस जैसी समस्या हो सकती है, जिसके लिए तुरंत मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ती है।
अंत में क्या करें?
काला तिल स्वाद और पोषण दोनों के लिहाज से अच्छा विकल्प हो सकता है। अगर आपको इसका स्वाद पसंद है तो आप इसे अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं। यदि नहीं, तो सफेद तिल भी लगभग समान पोषण लाभ देते हैं।
असल में सेहत के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि आपका भोजन संतुलित और विविधतापूर्ण हो। अलग-अलग प्रकार के खाद्य पदार्थ खाने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है।
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