विज्ञान

चंद्रयान-4 से चांद की मिट्टी लाने की तैयारी, इसरो ने बताए भविष्य के बड़े मिशन

भारत चंद्रयान-5, मंगल लैंडिंग और शुक्र मिशन की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है, 2040 तक भारतीयों को चंद्रमा पर भेजने की योजना।

Report| बेंगलुरु। Indian Space Research Organisation के प्रमुख V. Narayanan ने बताया कि भारत आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष अनुसंधान के कई बड़े मिशनों पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि Chandrayaan‑4 के तहत चंद्रमा से मिट्टी और अन्य नमूने इकट्ठा कर उन्हें पृथ्वी पर वापस लाने की योजना बनाई जा रही है।

उन्होंने बेंगलुरु में आयोजित अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम के चौथे संस्करण के उद्घाटन के दौरान कहा कि चंद्रयान कार्यक्रम को अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद आने वाले Chandrayaan‑5 में अधिक वजन वाला lander और लंबी अवधि तक काम करने वाला rover शामिल होगा।

नारायणन ने बताया कि Chandrayaan‑3 के दौरान लैंडर का मिशन जीवनकाल लगभग 14 दिन था, लेकिन आने वाले मिशनों में इसे काफी बढ़ाया जाएगा। नए मिशन में रोवर लगभग 100 दिनों तक सक्रिय रह सकेगा और उसका वजन भी पहले की तुलना में कहीं अधिक होगा।

उन्होंने बताया कि चंद्रयान-3 के रोवर का वजन लगभग 25 किलोग्राम था, जबकि भविष्य के मिशन में यह करीब 350 किलोग्राम तक हो सकता है। इससे चंद्रमा की सतह पर वैज्ञानिक प्रयोगों को और विस्तार से करने में मदद मिलेगी।

इसरो प्रमुख ने आगे कहा कि भारत 2035 तक अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रहा है। साथ ही 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाने की योजना पर भी विचार-विमर्श शुरू हो चुका है।

उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष अनुसंधान के अलावा इस क्षेत्र का उपयोग खाद्य सुरक्षा, जल प्रबंधन, संचार और नागरिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी किया जा रहा है। इसके साथ-साथ वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए कई नए कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं।

नारायणन ने यह भी कहा कि भारत पहले ही Mars Orbiter Mission के जरिए मंगल की परिक्रमा कर चुका है और अब अगला लक्ष्य मंगल ग्रह की सतह पर उतरने वाला मिशन है। इसके अलावा Shukrayaan‑1 के माध्यम से शुक्र ग्रह के अध्ययन की योजना भी बनाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि Narendra Modi के नेतृत्व में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई दिशा मिली है और आने वाले दो वर्षों में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी भी जारी है।

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