विज्ञान

ऊंचाई पर रहने से कम हो सकता है Diabetes का खतरा, नई रिसर्च में सामने आया दिलचस्प कारण

साइंटिस्ट्स के अनुसार High Altitude पर पतली हवा में रेड ब्लड सेल्स शरीर में ग्लूकोज़ को तेजी से सोख लेते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल कम रहने में मदद मिल सकती है।

Report.लंबे समय से यह देखा गया है कि ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाले लोगों में डायबिटीज़ का खतरा अपेक्षाकृत कम होता है। लेकिन अब तक वैज्ञानिक यह साफ-साफ नहीं समझ पाए थे कि इसके पीछे असली कारण क्या है।

अमेरिका के वैज्ञानिकों ने हाल ही में इस सवाल को समझने के लिए चूहों पर आधारित एक नई स्टडी की। इसमें टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज़ के माउस मॉडल का उपयोग किया गया। शोध के दौरान एक दिलचस्प बात सामने आई – जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है और हवा में ऑक्सीजन कम होती है, शरीर की रेड ब्लड सेल्स ग्लूकोज़ को तेजी से सोखने लगती हैं।

ऑक्सीजन कम होने पर बदल जाता है शरीर का व्यवहार

जब शरीर लंबे समय तक कम ऑक्सीजन वाले माहौल में रहता है, तो रेड ब्लड सेल्स की कार्यप्रणाली बदल जाती है। शोध में पाया गया कि ऐसी स्थिति में ये कोशिकाएं सामान्य की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक ग्लूकोज़ को अपने अंदर ले लेती हैं।

इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य शरीर को कम ऑक्सीजन की स्थिति में बेहतर तरीके से काम करने में मदद करना होता है। लेकिन इसके साथ ही एक अतिरिक्त फायदा भी मिलता है – ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रहने लगता है, जिससे डायबिटीज़ का खतरा कम हो सकता है।

ग्लूकोज़ आखिर जाता कहां है?

प्रयोग के दौरान वैज्ञानिकों ने देखा कि जब चूहों को शुगर दी गई, तो वह बहुत तेजी से उनके ब्लड से गायब हो गई। शुरू में यह स्पष्ट नहीं था कि यह शुगर शरीर के किस हिस्से में जा रही है।

आमतौर पर माना जाता है कि ग्लूकोज़ मांसपेशियों, दिमाग या लिवर में जाता है, लेकिन इस अध्ययन में ऐसा नहीं पाया गया। बाद में उन्नत इमेजिंग तकनीकों और अतिरिक्त परीक्षणों से पता चला कि रेड ब्लड सेल्स ही बड़ी मात्रा में ग्लूकोज़ को सोख रही थीं।

हीमोग्लोबिन की अहम भूमिका

रिसर्च में एक खास मॉलिक्यूल की पहचान की गई, जो हीमोग्लोबिन पर असर डालता है। हीमोग्लोबिन वही प्रोटीन है जो रेड ब्लड सेल्स में ऑक्सीजन को पूरे शरीर में पहुंचाने का काम करता है।

जब यह मॉलिक्यूल सक्रिय होता है, तो हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन पकड़ने की क्षमता थोड़ी ढीली हो जाती है। इससे टिशू तक ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है और साथ ही ग्लूकोज़ का इस्तेमाल भी बढ़ जाता है।

रेड ब्लड सेल्स की नई भूमिका

आमतौर पर रेड ब्लड सेल्स को सिर्फ ऑक्सीजन ले जाने वाली कोशिकाएं माना जाता है। लेकिन इस स्टडी से संकेत मिलता है कि ये शरीर में ग्लूकोज़ के उपयोग में भी अहम भूमिका निभा सकती हैं, खासकर तब जब ऑक्सीजन का स्तर कम हो।

भविष्य में इलाज का नया रास्ता

रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने एक ऐसी दवा भी विकसित की जो शरीर में ऊंचाई वाले माहौल जैसा असर पैदा कर सकती है। जब यह दवा डायबिटीज़ वाले चूहों को दी गई, तो उनके ब्लड शुगर लेवल में सुधार देखा गया।

हालांकि यह अभी शुरुआती चरण का शोध है और इसे इंसानों पर लागू करने के लिए आगे और परीक्षणों की जरूरत होगी।

दूसरे जानवरों में भी दिखता है यह असर

वैज्ञानिकों का मानना है कि कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में शरीर का यह अनुकूलन केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। कई अन्य प्रजातियों में भी ऐसा तंत्र विकसित हुआ है, जिससे वे ऊंचाई वाले इलाकों में ऊर्जा का बेहतर उपयोग कर पाते हैं।

शेरपाओं में क्यों अलग है असर?

दिलचस्प बात यह है कि हिमालय के शेरपा समुदाय में यह प्रभाव उतना स्पष्ट नहीं दिखता। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके पीछे आनुवंशिक अनुकूलन हो सकता है, जो उनके शरीर को अलग तरीके से ढलने में मदद करता है।

अभी शुरुआत है रिसर्च की

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज अभी शुरुआती चरण में है और शरीर में ऑक्सीजन के बदलावों के साथ होने वाले मेटाबोलिक बदलावों को समझने के लिए अभी और अध्ययन की जरूरत है।

भविष्य में यह जानकारी डायबिटीज़ सहित कई बीमारियों के नए इलाज विकसित करने में मदद कर सकती है।

नए खबरों के लिए बने रहे सटीकता न्यूज के साथ।

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