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खनन ने जंगलों को तबाह कर दिया,राज्य ज़िम्मेदारी निभाने में नाकाम

छत्तीसगढ़ : 44 प्रतिशत वन क्षेत्र वाला छत्तीसगढ़ खनन और औद्योगिक परियोजनाओं की कीमत चुका रहा है। हर साल वनों की कटाई बढ़ रही है, लेकिन हरियाली बचाने की ज़िम्मेदारी निभाने में कॉर्पोरेट जगत का रवैया बेहद ढीला-ढाला है। अरबों रुपये का मुनाफ़ा कमाने वाली कंपनियों ने पिछले नौ सालों में पर्यावरण संरक्षण पर सीएसआर फंड से सिर्फ़ 171 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह राशि राज्य में हो रहे विनाश के सामने सागर में एक बूँद के समान है।

पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, कॉर्पोरेट खर्च पर्यावरण संरक्षण के तीन प्रमुख मदों – प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, कृषि-वानिकी और पर्यावरणीय स्थिरता – में किया जाता है। आँकड़े बताते हैं कि यह खर्च न केवल कम है, बल्कि कई वर्षों से लगभग नाममात्र का ही है। छत्तीसगढ़ में खनन के लिए वनों की कटाई का सिलसिला थम नहीं रहा है। हर साल लाखों टन बॉक्साइट, कोयला, लोहा और चूना पत्थर निकाला जाता है। बड़े पैमाने पर जंगलों का सफ़ाया किया जाता है, लेकिन कंपनियाँ पर्यावरण संरक्षण के नाम पर सिर्फ़ औपचारिकताएँ निभाती हैं। राज्य में इस्पात, बिजली और सीमेंट उद्योगों की भारी उपस्थिति है। ये कंपनियां खनिज संसाधनों से अरबों कमा रही हैं, लेकिन सीएसआर के तहत पर्यावरण को बचाने में उनकी भूमिका बेहद कमजोर है।

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