भगवान का नाम लेने से चमत्कार नहीं, भरोसा करने से रास्ते खुलते हैं।

एक दूधवाली औरत नदी के दूसरी तरफ रहने वाले एक आदमी को रोज़ दूध देती थी। लेकिन नाव के आने का कोई तय समय नहीं था, इसलिए वह अक्सर लेट हो जाती थी। एक दिन, वह थोड़ी देर से पहुँची, तो आदमी ने उसे डाँटा। औरत ने कहा, “मैं सुबह घर से जल्दी निकलती हूँ, लेकिन नाव का इंतज़ार करते-करते देर हो जाती है।” यह सुनकर आदमी ने मज़ाक में कहा, “लोग भगवान का नाम लेकर समंदर पार कर जाते हैं, और तुम यह छोटी सी नदी भी पार नहीं कर सकती!” औरत ने आदमी की बात पर यकीन कर लिया। अगले दिन से, वह रोज़ सुबह दूध देने लगी। एक दिन, आदमी ने पूछा, “तुम इतनी जल्दी वहाँ कैसे पहुँच जाती हो?” औरत ने जवाब दिया, “जैसा तुमने मुझे बताया, मैं भगवान का नाम लेकर नदी पार करती हूँ।” आदमी को उस पर यकीन नहीं हुआ। वह उसे नदी किनारे ले गई और भगवान का नाम लेते हुए, बिना डरे पानी पर चलने लगी। पीछे मुड़कर उसने देखा कि वह आदमी अपने कपड़े गीले होने से बचाने की कोशिश कर रहा है। औरत ने कहा, “तुम मुँह से तो भगवान का नाम लेते हो, लेकिन दिल से उन पर भरोसा नहीं कर पाते।” आदमी को पछतावा हुआ। उसने कहा, “आज मुझे सच्ची भक्ति का मतलब समझ में आया।” औरत ने कहा, “भगवान पर भरोसा रखो, वही सबको सही रास्ता दिखाते हैं।”
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