कोविड वैक्सीन से जुड़े दुर्लभ ब्लड क्लॉट का रहस्य सुलझा, वैज्ञानिकों ने खोजा असली कारण
नई स्टडी में पता चला कि कुछ लोगों में वैक्सीन के बाद बनने वाली खास antibodies और इम्यून रिएक्शन मिलकर खतरनाक blood clot का कारण बन सकते हैं

Report| कोविड महामारी के दौरान लगाए गए टीकों ने दुनियाभर में लाखों लोगों की जान बचाई। हालांकि टीकाकरण के बाद बहुत कम मामलों में एक अजीब तरह की समस्या सामने आई, जिसमें शरीर के असामान्य हिस्सों में खतरनाक ब्लड क्लॉट बनने लगे।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह समस्या मुख्य रूप से उन टीकों के बाद देखी गई जिनमें मॉडिफाइड एडेनोवायरस तकनीक का इस्तेमाल किया गया था, जैसे कि AstraZeneca COVID-19 vaccine। इस दुर्लभ स्थिति को VITT (Vaccine-Induced Immune Thrombocytopenia and Thrombosis) नाम दिया गया।
क्या होता है VITT
इस स्थिति में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही एक प्रोटीन प्लेटलेट फैक्टर-4 को दुश्मन समझकर उस पर हमला कर देता है।
ऐसे में बनने वाली antibodies प्लेटलेट फैक्टर-4 से चिपककर बड़े-बड़े इम्यून कॉम्प्लेक्स बना देती हैं। इससे प्लेटलेट्स सक्रिय हो जाते हैं और शरीर में खतरनाक blood clot बनने लगते हैं।
कई देशों के वैज्ञानिकों ने किया शोध
इस रहस्य को समझने के लिए ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जर्मनी के वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने गहराई से अध्ययन किया। उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से VITT से प्रभावित लगभग 100 मरीजों के नमूनों का विश्लेषण किया।
इस रिसर्च में दो ऐसे मरीज भी शामिल थे जिन्होंने वैक्सीन लगने से पहले रक्तदान किया था। उनके पुराने सैंपल जर्मनी की ब्लड सर्विस में सुरक्षित रखे गए थे, जो इस अध्ययन में बेहद अहम साबित हुए।
एडेनोवायरस से जुड़ी इम्यून मेमोरी
रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों को पता चला कि VITT में बनने वाली एंटीबॉडी शुरुआत में एक एडेनोवायरल प्रोटीन को पहचानती हैं, जिसे प्रोटीन VII कहा जाता है।
संभावना है कि यह प्रतिक्रिया शरीर की पुरानी इम्यून मेमोरी से जुड़ी होती है, क्योंकि बचपन में एडेनोवायरस संक्रमण आम होता है और यह अक्सर हल्के सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण पैदा करता है।
छोटे जेनेटिक बदलाव से बढ़ा खतरा
इन्फेक्शन या वैक्सीनेशन के दौरान एंटीबॉडी बनाने वाली कोशिकाओं में छोटे-छोटे जेनेटिक बदलाव होना सामान्य बात है। यह प्रक्रिया इम्यून सिस्टम को संक्रमण से बेहतर तरीके से लड़ने में मदद करती है।
लेकिन VITT के मामलों में वैज्ञानिकों ने पाया कि एंटीबॉडी के एक छोटे हिस्से में खास तरह का बदलाव हो जाता है। यह बदलाव उसे प्लेटलेट फैक्टर-4 से बेहद मजबूती से जुड़ने की क्षमता दे देता है।
इसलिए यह बीमारी बेहद दुर्लभ है
शोधकर्ताओं के मुताबिक इस स्थिति के होने के लिए दो दुर्लभ घटनाओं का एक साथ होना जरूरी है।
पहली — किसी व्यक्ति में एक खास इम्यून जीन वेरिएंट होना चाहिए।
दूसरी — एडेनोवायरस के खिलाफ बनने वाली एंटीबॉडी बनाने वाली कोशिका में दुर्लभ म्यूटेशन होना चाहिए।
जब ये दोनों स्थितियां साथ आती हैं, तभी इम्यून सिस्टम प्लेटलेट फैक्टर-4 पर हमला करना शुरू करता है और ब्लड क्लॉट बनने लगते हैं।
भविष्य की वैक्सीन को सुरक्षित बनाने में मदद
हालांकि यह समस्या बेहद दुर्लभ रही है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इसे समझना बहुत जरूरी है।
एडेनोवायरस आधारित वैक्सीन अभी भी दुनिया भर में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं क्योंकि इन्हें बनाना आसान, सस्ता और बड़े पैमाने पर उपयोग करना संभव है।
इस नई खोज से वैज्ञानिक भविष्य की वैक्सीन डिजाइन को और सुरक्षित बना सकते हैं ताकि इस तरह की दुर्लभ इम्यून प्रतिक्रिया की संभावना को कम किया जा सके।
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