पड़ोसी का हक़: इंसानियत, ईमान और समाज की सबसे बड़ी पहचान

इंसान स्वभाव से ही सोशल होते हैं। उन्हें अकेले में शांति नहीं मिलती। दूसरों के साथ रहना एक ज़रूरत भी है और एक अच्छाई भी। इसी वजह से, इस्लाम ने सोशल लाइफ के लिए साफ़ और सुंदर उसूल बनाए हैं, जिनमें पड़ोसियों के हक़ एक ज़रूरी हिस्सा हैं।
पड़ोसी कौन है?
पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाओं के अनुसार, जिसका दरवाज़ा आपके सबसे पास है, वह आपका पड़ोसी है और आप पर उसका सबसे ज़्यादा हक़ है। ‘करीब’ सिर्फ़ दूरी का उल्टा नहीं है, बल्कि यह एक इंसानी, सोशल और नैतिक रिश्ते का नाम भी है। पैगंबर मुहम्मद ने कहा: “अल्लाह की कसम, वह ईमान वाला नहीं है… वह ईमान वाला नहीं है… वह ईमान वाला नहीं है… जिसका पड़ोसी उसकी परेशानियों से सुरक्षित नहीं है।” ये शब्द बताते हैं कि पड़ोसी को परेशान करना ईमान के खिलाफ़ है।
पड़ोसी – इंसानी चरित्र का आईना: किसी इंसान का असली स्वभाव, नैतिक स्टैंडर्ड, व्यवहार और व्यवहार सबसे पहले उसके पड़ोसियों में दिखता है। अगर आप किसी व्यक्ति या समाज की असली तस्वीर देखना चाहते हैं, तो उसके पड़ोसियों से पूछिए—वे असली स्वभाव दिखा देंगे। आज के समाज की हालत –
आज का समाज मतलबीपन, बेपरवाही और दूरी का शिकार होता जा रहा है। कभी-कभी तो यह भी पता चलता है कि फ्लैट में किसी की मौत हो गई है और पड़ोसियों को पता ही नहीं चलता। यह पढ़े-लिखे समाज के लिए शर्म की बात है। हमें एक-दूसरे को जानकारी देते रहना चाहिए, दिलचस्पी लेनी चाहिए और रिश्ते मज़बूत करने चाहिए।
छोटी-छोटी बातों में गाइडेंस –
मुहम्मद साहब ने पड़ोसियों के हक सिर्फ़ बड़े-बड़े उसूलों में ही नहीं, बल्कि बहुत छोटी-छोटी बातों में भी समझाए हैं:
- दिखावे से बचें। अगर आपका पड़ोसी गरीब है, तो ऐसी चीज़ें न दिखाएँ जिनसे उसके दिल में कोई चाहत पैदा हो। जैसे, अगर आप फल खाते हैं, तो उसके छिलके दरवाज़े पर न फेंकें।
- अपना खाना शेयर करें। सब्ज़ी या सूप बनाते समय, थोड़ा ज़्यादा रखें ताकि उसे अपने पड़ोसी के साथ शेयर कर सकें।
- छोटी-छोटी चीज़ें देने में भी न हिचकिचाएँ, चाहे वह माचिस हो, नमक हो या चीनी। ज़रूरतमंद पड़ोसी की मदद करना ही इंसानियत है। अल्लाह और उसके रसूल से प्यार का रास्ता: जो कोई भी अल्लाह और उसके रसूल के करीब रहना चाहता है, उसे सच बोलना चाहिए, धोखा देने से बचना चाहिए और अपने पड़ोसियों के साथ अच्छा बर्ताव करना चाहिए, क्योंकि अपने पड़ोसियों के साथ अच्छा बर्ताव करना अच्छे किरदार की निशानी है।
क़यामत के दिन पहला फ़ैसला – हदीस में कहा गया है कि क़यामत के दिन पड़ोसियों के बीच के मामलों का फ़ैसला सबसे पहले होगा। यह बात ही इस हक़ की अहमियत बताने के लिए काफ़ी है।
हमारा भारतीय समाज: हम एक ऐसे देश में रहते हैं जहाँ अलग-अलग धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं। चाहे दिवाली हो या ईद, हम सब मिलकर मनाते हैं। इसलिए, यह हमारा फ़र्ज़ है कि हम धर्म, जाति या भाषा से ऊपर उठकर अपने पड़ोसियों के साथ अच्छा बर्ताव करें, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो।
समाज की असली ज़रूरत – आज सबसे बड़ी ज़रूरत यह है कि हम: एक-दूसरे का ध्यान रखें, मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ दें, रिश्ते मज़बूत करें, ऊँचे नैतिक आदर्श बनाए रखें क्योंकि एक बेहतर समाज की शुरुआत पड़ोस से होती है।
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