भारत-UK के बीच AI साझेदारी को नई रफ्तार, टेक सहयोग पर वैश्विक नेताओं का जोर

Senior Reporter India | नई दिल्ली। कनिष्क नारायण ने भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच तेजी से मजबूत हो रहे तकनीकी सहयोग की सराहना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारर की हालिया मुलाकातों और दौरों से टेक्नोलॉजी व व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा और गति मिली है।
AI Impact Conference के मंच से नारायण ने कहा कि Artificial Intelligence हमारी पीढ़ी को परिभाषित करने वाली तकनीक बन चुकी है। उनका मानना है कि इसके लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचने चाहिए, न कि केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित रहें। उन्होंने कहा कि भारत और UK, दोनों देशों की सोच AI के भविष्य को लेकर काफी हद तक समान है। साझा मूल्यों और उत्साह के साथ दोनों देश इस तकनीक को अपनाते हुए नए अवसर पैदा करना चाहते हैं, साथ ही इसका जिम्मेदार उपयोग भी सुनिश्चित करना चाहते हैं।
नारायण ने बेंगलुरु को वैश्विक टेक इकोसिस्टम का केंद्र बताया। उनके अनुसार, बेंगलुरु, लंदन, कर्नाटक और UK मिलकर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन, भारत को एक स्वाभाविक तकनीकी साझेदार के रूप में देखता है।
इस दौरान ताजिकिस्तान का उद्योग और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत AI काउंसिल के वाइस-चेयरमैन फ़िरुज्जोन सोदिकोव ने कहा कि AI प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकता है। पहले जिन कार्यों में काफी समय और संसाधन खर्च होते थे, अब AI के जरिए उन्हें अधिक प्रभावी और दक्ष बनाया जा सकता है।
भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने तकनीकी क्षेत्र में जेंडर असंतुलन को खत्म करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संरचनात्मक स्तर पर ठोस कदम उठाने होंगे ताकि महिलाओं की भागीदारी बढ़े, नेटवर्किंग मजबूत हो और AI डेवलपमेंट में उनकी भूमिका सशक्त हो।
वहीं US-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम के अध्यक्ष और CEO मुकेश अघी ने कहा कि भारत ने AI को किफायती और सुलभ बनाने में उल्लेखनीय बढ़त बनाई है। उन्होंने कहा कि भारत ने इस तकनीक को केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आम लोगों तक इसकी पहुंच आसान बनाने पर जोर दिया है।
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