नई स्मार्ट चिप: कम एनर्जी, तेज़ डेटा प्रोसेसिंग और इन-मेमोरी कंप्यूटिंग में क्रांति

Senior Reporter India| बेंगलुरु/इटली।वैज्ञानिकों ने हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए एक नई स्मार्ट चिप विकसित की है, जो भारी डेटा को पहले से कहीं अधिक तेजी से प्रोसेस कर सकती है और ऊर्जा की खपत को भी काफी घटा देती है। इस चिप का विकास पॉलिटेक्निको डि मिलानो यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रॉनिक्स, इन्फॉर्मेशन और बायोइंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के वैज्ञानिकों ने किया। प्रोजेक्ट का नेतृत्व प्रोफेसर डेनियल इएलमिनी ने किया, और रिसर्चर पियरग्यूलियो मानोच्ची इसके मुख्य लेखक हैं।
ANIMATE प्रोजेक्ट और CL-IMC कॉन्सेप्ट
यह रिसर्च ANIMATE प्रोजेक्ट (एनालॉग इन-मेमोरी कंप्यूटिंग विद एडवांस्ड डिवाइस टेक्नोलॉजी) के तहत हुई, जो CL-IMC (क्लोज्ड-लूप इन-मेमोरी कंप्यूटिंग) कॉन्सेप्ट पर आधारित है। इसका उद्देश्य पारंपरिक डिजिटल कंप्यूटर के मुकाबले 5000 गुना कम ऊर्जा में कैलकुलेशन करना था।
इन-मेमोरी कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी
पारंपरिक कंप्यूटर में डेटा बार-बार मेमोरी और प्रोसेसर के बीच जाता है, जिससे समय और ऊर्जा दोनों ज्यादा खर्च होते हैं। इस नई चिप में इन-मेमोरी कंप्यूटिंग का इस्तेमाल किया गया है, जिससे कैलकुलेशन सीधे मेमोरी के अंदर होते हैं और डेटा ट्रैफिक पूरी तरह खत्म हो जाता है।
एडवांस्ड चिप आर्किटेक्चर
चिप में 64×64 साइज़ के दो प्रोग्रामेबल रेजिस्टिव मेमोरी एरे हैं, जो SRAM टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं। रेजिस्टेंस लेवल बदलकर अलग-अलग कैलकुलेशन किए जा सकते हैं।
एनालॉग प्रोसेसिंग
इस चिप में ऑपरेशनल एम्पलीफायर और एनालॉग-टू-डिजिटल कन्वर्टर जैसे कंपोनेंट जोड़े गए हैं, जिससे यह जटिल कैलकुलेशन अधिक कुशलता से कर सकती है।
बेहतर प्रदर्शन और कम ऊर्जा
टेस्ट में चिप ने पारंपरिक डिजिटल सिस्टम जितनी सटीकता दिखाई, लेकिन कम पावर खपत, तेज़ नतीजे और कम सिलिकॉन एरिया के फायदे भी दिए। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह चिप इंडस्ट्रियल लेवल पर एनालॉग इन-मेमोरी कंप्यूटिंग को संभव बनाती है। रिसर्चर मानोच्ची के अनुसार, इस प्रोजेक्ट में पेकिंग यूनिवर्सिटी सहित कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग शामिल है।
भविष्य की संभावनाएं
नई चिप का उपयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डेटा सेंटर, 5G/6G नेटवर्क और वायरलेस कम्युनिकेशन में क्रांति ला सकता है। यह तकनीक कंप्यूटिंग को तेज़, सस्ता, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाएगी। आने वाले सालों में इन-मेमोरी कंप्यूटिंग दुनिया की रीढ़ बन सकती है। यह रिसर्च प्रतिष्ठित पत्रिका Nature Electronics में प्रकाशित हुई है।
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