दक्षिण कश्मीर में ‘सफेदपोश आतंकवाद’ का नया खतरा — डॉक्टर भी बने आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा

भारत । जम्मू। दक्षिण कश्मीर में सफेदपोश आतंकवाद एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन रहा है। शिक्षकों, इंजीनियरों और सरकारी पुलिसकर्मियों की गिरफ़्तारी तो हो ही रही है। अब डॉक्टरों को बहला-फुसलाकर आतंकवाद के लिए इस्तेमाल करना आतंकी संगठनों की एक नई साज़िश मानी जा रही है। डॉक्टरों को एक पवित्र पेशा माना जाता था, इसलिए इस पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया गया। आतंकियों ने इसी का फ़ायदा उठाया और डॉक्टरों को एक नए आतंकी मॉड्यूल में इस्तेमाल किया। इस आतंकी मॉड्यूल में मारे गए उमर और तीन अन्य आतंकी डॉक्टर दक्षिण कश्मीर के रहने वाले हैं। यह इलाका जमात-ए-इस्लामी और दूसरे कट्टरपंथी संगठनों का गढ़ रहा है। दिल्ली धमाकों में डॉ. उमर नबी की संलिप्तता इस बात का सबूत है कि आतंकी संगठनों ने धर्म और कश्मीर की आज़ादी के नाम पर पढ़े-लिखे युवाओं को भड़काकर आतंकी बनने की अपनी नई साज़िश फिर से शुरू कर दी है।
हालाँकि पहले भी पढ़े-लिखे युवा आतंकी संगठनों में शामिल होते रहे हैं, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ गया है। आतंकी अब ऐसे युवाओं को भर्ती कर रहे हैं जिन्होंने मेडिकल की पढ़ाई की है और पहले ही डॉक्टर बन चुके हैं। सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल इसका सबूत है। पिछले कुछ सालों में सुरक्षा एजेंसियों ने इस मुद्दे पर कड़ी कार्रवाई की है। अब वे इस बढ़ते चलन को एक बड़ा खतरा मान रहे हैं। हिजबुल मुजाहिदीन के साथ-साथ लश्कर, जैश और अंसार गजवत-उल-हिंद ने ऐसे युवाओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। स्नातक, स्नातकोत्तर और पेशेवर शिक्षा प्राप्त करने वालों के बाद अब कुछ डॉक्टर भी आतंकवाद में शामिल हो रहे हैं। पूर्व डीजीपी एसपी वैद कहते हैं कि 2019 के बाद से एजेंसियों ने कश्मीर में धर्म के नाम पर युवाओं की आमद पर अपनी पकड़ काफी मजबूत कर ली है।
सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर निगरानी बढ़ा दी गई है। आतंकी संगठन नए-नए हथकंडे अपनाते हैं, जिसमें वे अक्सर कामयाब भी होते हैं। ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) डॉ. विजय सागर धीमान ने कहा कि पहले भी पढ़े-लिखे लोग आतंकी बनते थे और आज भी बन रहे हैं। अमेरिका में 9/11 के हमले को अंजाम देने वाले आतंकी भी पढ़े-लिखे थे। डॉक्टरों के आतंकी मॉड्यूल में गिरफ्तार चारों डॉक्टर दक्षिण कश्मीर के रहने वाले हैं। दक्षिण कश्मीर जमात-ए-इस्लामी का गढ़ है। इस संगठन की विचारधारा देश विरोधी है। पाकिस्तान ने 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर में पीढ़ी दर पीढ़ी कट्टरपंथ की शुरुआत की। यह पिछले सात-आठ दशकों से जारी है। पीढ़ी दर पीढ़ी कट्टरपंथ 1990 में अपने चरम पर पहुँच गया।
नए खबरों के लिए बने रहे सटीकता न्यूज के साथ।




