बांग्लादेश में हिंसा का तांडव, ढाका में अखबार दफ्तर जले, हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या

Dhaka/New Delhi। बांग्लादेश एक बार फिर भीषण हिंसा की चपेट में आ गया है। गुरुवार देर रात, पिछले जुलाई के छात्र आंदोलन के नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत की खबर फैलने के बाद बेकाबू भीड़ सड़कों पर उतर आई। हादी की मौत सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान हुई थी। भीड़ ने राजधानी ढाका सहित कई शहरों में बड़े पैमाने पर हिंसा फैलाई। ढाका में, तीन बड़े अखबारों—प्रथम आलो, द डेली स्टार और न्यू एज—के दफ्तरों में आग लगा दी गई। भीड़ ने एक युवा हिंदू व्यक्ति, दीपू चंद्र दास को ईशनिंदा का आरोप लगाकर पीट-पीटकर मार डाला और फिर उसके शव को जला दिया। दीपू मैमनसिंह शहर की एक फैक्ट्री में काम करता था।
भीड़ ने बांग्लादेश की आज़ादी के नायक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के पहले से ही क्षतिग्रस्त घर को भी निशाना बनाया। हादी को नकाबपोश लोगों ने सिर में गोली मारी थी। शरीफ उस्मान हादी इंकलाब मंच (क्रांतिकारी मंच) के प्रवक्ता थे और भारत विरोधी बयानों के कारण कट्टरपंथियों के बीच लोकप्रिय थे। उम्मीद थी कि वह फरवरी में होने वाले चुनावों में हिस्सा लेंगे, लेकिन हाल ही में कुछ नकाबपोश लोगों ने उन्हें सिर में गोली मार दी। उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
बांग्लादेश के सबसे पुराने और प्रमुख सांस्कृतिक संगठनों में से एक, छायानाट को भी दंगाइयों ने निशाना बनाया। प्रदर्शनकारियों ने धनमंडी में छायानाट के दफ्तर में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। दफ्तर के अंदर टूटे-फूटे फर्नीचर और संगीत वाद्ययंत्र हिंसा की गवाही दे रहे हैं। संगठन के अनुसार, किताबें, संगीत वाद्ययंत्र और अन्य सांस्कृतिक कलाकृतियों जैसी कई दुर्लभ चीजें पूरी तरह से नष्ट हो गईं। हमले के दौरान वहां मौजूद कई छात्र रोते हुए देखे गए।
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