प्रदूषण बना बच्चों का सबसे बड़ा दुश्मन — 43% स्वास्थ्य बीमा दावे 0-10 साल के बच्चों के नाम

New Delhi । प्रदूषण मासूमों पर सबसे ज़्यादा कहर ढाता है। यह सच्चाई स्वास्थ्य बीमा दावों से उजागर होती है।
दरअसल, प्रदूषण से जुड़े सभी स्वास्थ्य बीमा दावों में से 43 प्रतिशत 0-10 साल के बच्चों के लिए हैं। पॉलिसीबाज़ार की एक नई रिपोर्ट बताती है कि बच्चे अन्य सभी आयु वर्गों की तुलना में प्रदूषण से पाँच गुना ज़्यादा प्रभावित होते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 31-40 वर्ष की आयु के लोगों के लिए प्रदूषण से जुड़े स्वास्थ्य बीमा दावों का हिस्सा 14 प्रतिशत है, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए यह आंकड़ा केवल सात प्रतिशत है। कुल अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों में प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों का हिस्सा आठ प्रतिशत है, जिनमें श्वसन और हृदय संबंधी बीमारियाँ सबसे ज़्यादा प्रचलित हैं। दिल्ली में प्रदूषण से जुड़े स्वास्थ्य बीमा दावों की संख्या सबसे ज़्यादा दर्ज की गई, जबकि बेंगलुरु और हैदराबाद में भी दावों का अनुपात ज़्यादा रहा।
जयपुर, लखनऊ और इंदौर जैसे टियर-2 शहरों में भी मामलों में वृद्धि देखी गई है, जिसका अर्थ है कि यह संकट अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वायु प्रदूषण केवल पर्यावरणीय ही नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल बन गया है। बीमारियों के कारण होने वाले चिकित्सा खर्च में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रदूषण से संबंधित औसत बीमा दावा 55,000 रुपये था और अस्पताल में भर्ती होने का औसत खर्च 19,000 रुपये प्रतिदिन था। दिवाली के आसपास प्रदूषण संबंधी बीमारियां बढ़ जाती हैं। दिवाली के आसपास त्योहार के बाद की बीमारियां सबसे ज्यादा होती हैं। दिवाली के आसपास ऐसे दावों में 14 प्रतिशत की वृद्धि होती है, जो वह समय है जब भारत में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में तेज वृद्धि देखी जाती है।
इसका मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है और वायु की गुणवत्ता बिगड़ रही है। पिछले चार वर्षों में प्रदूषण से संबंधित बीमा दावों में लगातार वृद्धि हुई है। प्रदूषण से संबंधित दावे 2022 में दिवाली से पहले 6.4 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में दिवाली के बाद 9 प्रतिशत हो गए। यह बढ़ते स्वास्थ्य बोझ की ओर इशारा करता है। प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं बल्कि कई अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है देश के कई हिस्सों में अक्टूबर के अंत और दिसंबर की शुरुआत के बीच पराली जलाने, आतिशबाजी और सर्दियों में स्थिर हवा के कारण प्रदूषण का स्तर मध्यम से गंभीर हो जाता है। अकेले सितंबर 2025 में, अस्पताल में भर्ती होने के सभी दावों में से नौ प्रतिशत वायु प्रदूषण से संबंधित बीमारियों के कारण थे। मरीज़ प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों जैसे सांस की समस्या, हृदय रोग, त्वचा और आँखों की एलर्जी से पीड़ित थे।
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