
रायपुर/ छत्तीसगढ़ : दवाओं और मेडिकल जांच-उपकरणों की खरीद में कमीशनखोरी और लापरवाही ने छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों को मौत के अड्डे में तब्दील कर दिया है। गरीब मरीजों के इलाज के नाम पर जंग लगे सर्जिकल ब्लेड ऑपरेशन थिएटर में भेज दिए गए। गर्भवती महिलाओं के लिए आई प्रेगनेंसी किट 50 फीसदी गलत रिपोर्ट दे रही है। जीवन रक्षक इंजेक्शन दो बार जांच में फेल हो चुके हैं। यह कोई आरोप नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) के आदेश में दर्ज सच्चाई है। पिछले 22 दिनों में छह बार खरीद रोकने के आदेश जारी हुए, लेकिन घटिया दवाओं और मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति का खेल थम नहीं रहा है।
ताजा मामला ऑपरेशन थिएटर में पहुंची जंग लगे सर्जिकल ब्लेड का है। सीजीएमएससी ने खुद आदेश जारी किया है कि निर्माता गोल्डविन मेडिकेयर लिमिटेड के बैच नंबर जी-409 के सर्जिकल ब्लेड की आपूर्ति तत्काल रोकी जाए। आदेश में साफ लिखा है कि इन ब्लेड को रायपुर स्थित दवा गोदाम में वापस भेज दिया जाए। यानी, यह इस बात की स्वीकारोक्ति है कि सरकारी अस्पतालों में सर्जरी के लिए इस्तेमाल होने वाले ब्लेड भी घटिया सामान के खेल में शामिल रहे हैं। कुछ दिन पहले जंग लगे सर्जिकल ब्लेड से ऑपरेशन का खुलासा हुआ था, जिसे स्वास्थ्य विभाग छिपा नहीं सका। सर्जिकल ब्लेड को छिपाने की बहुत कोशिश की गई, लेकिन विभाग कामयाब नहीं हुआ। 1 जुलाई को कैटल हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आपूर्ति किए गए IVEB 24 F12 ग्लूकोज सलाइन इंट्रावेनस ड्रिप सेट के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई।
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