बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य सुलझा? वैज्ञानिक ने बताया खौफनाक सच

बरमूडा ट्रायंगल, समुद्र का वो इलाका, जो दशकों से रहस्य और डर का पर्याय बना हुआ है। फ्लोरिडा, प्यूर्टो रिको और बरमूडा के बीच फैले इस समुद्री त्रिभुज में जहाज और विमान अचानक गायब होते रहे हैं। यूएफओ से लेकर अंतर-आयामी पोर्टल्स तक, यहां कई अजीबोगरीब सिद्धांत गढ़े गए हैं। लेकिन अब एक वैज्ञानिक का दावा है कि उन्होंने आखिरकार इस पहेली को सुलझा लिया है। साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय के समुद्र विज्ञानी डॉ. साइमन बॉक्सॉल के मुताबिक, इन दुर्घटनाओं के लिए रॉग वेव्स जिम्मेदार हैं। रॉग वेव्स यानी समुद्र में अचानक उठने वाली 100 फीट तक ऊंची लहरें, जो आसपास की लहरों से दोगुनी बड़ी और कहीं ज्यादा खतरनाक होती हैं। ये अप्रत्याशित दिशा से टकरा सकती हैं और बड़े से बड़े जहाज को भी कुछ ही मिनटों में डुबो सकती हैं। रहस्य से ज्यादा हकीकत। हालांकि, सभी वैज्ञानिक इस दावे से सहमत नहीं हैं। अमेरिकी संस्था एनओएए और लंदन की बीमा कंपनी लॉयड्स का कहना है कि बरमूडा ट्रायंगल में दुर्घटनाएं दूसरे समुद्री इलाकों से ज्यादा नहीं होतीं। एनओएए का कहना है- ‘इस बात का कोई सबूत नहीं है कि यहां गायब होने की घटनाएं असामान्य रूप से ज्यादा हैं।’
बरमूडा ट्रायंगल की सबसे चर्चित घटना यूएसएस साइक्लोप्स का गायब होना है। 542 फीट लंबा यह अमेरिकी नौसैनिक जहाज मार्च 1918 में 306 क्रू मेंबर्स के साथ यहीं गायब हो गया था। आज तक न तो कोई एसओएस सिग्नल मिला है और न ही कोई मलबा। इस घटना के बाद षड्यंत्र और एलियन थ्योरी सबसे ज्यादा फैलीं। लेकिन डॉ. बॉक्सॉल का कहना है कि जहाज को निगलने की असली वजह ये विशाल लहरें थीं। डॉ. बॉक्सॉल बताते हैं कि उत्तर और दक्षिण से आने वाले तूफान इस इलाके में टकराते हैं। जब हवाएं और समुद्री धाराएं मिलती हैं, तो अचानक दुष्ट लहरें बन जाती हैं। वह कहते हैं- ‘जहाज जितना बड़ा होगा, उसे उतना ही ज्यादा नुकसान होगा। लहरें इतनी ऊंची और खड़ी हो सकती हैं कि वे जहाज को बीच से तोड़ सकती हैं।’ फिर भी, डॉ. बॉक्सॉल और उनकी टीम ने यूएसएस साइक्लोप्स का एक मॉडल बनाया और उसकी जांच की डॉ. बॉक्सॉल कहते हैं- “हमने 30 मीटर से भी ऊँची लहरों को मापा है। ऐसी लहरें जहाज़ को सिर्फ़ दो-तीन मिनट में समुद्र की गहराई में ले जाती हैं। यही वजह है कि कई जहाज़ बिना कोई संदेश दिए रहस्यमय तरीके से डूब गए।”
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