श्री कृष्ण वृक्षों में ‘पीपल’ हैं

संकेत: प्रस्तुत मंत्र पद्मपुराण के सृष्टिखंड से लिया गया है, जिसमें ‘पीपल वृक्ष’ लगाने से प्राप्त होने वाले अनंत पुण्यों का वर्णन है।मंत्र का अर्थ: पद्मपुराण के माध्यम से बताया गया है कि जो व्यक्ति स्नान करने के पश्चात पीपल वृक्ष को स्पर्श करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं तथा जो व्यक्ति बिना स्नान किए इसे स्पर्श करता है, उसे तीर्थ में स्नान करने का फल प्राप्त होता है।
पीपल वृक्ष के दर्शन मात्र से पाप नष्ट हो जाते हैं तथा इसे स्पर्श करने से व्यक्ति का सौभाग्य बढ़ता है। इसकी परिक्रमा करने से आयु बढ़ती है। अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। हे ऐसे दिव्य तेज वाले अश्वत्थ! मैं आपको सदैव नमस्कार करता हूँ। हविष्य, नैवेद्य, पुष्प, धूप, दीप आदि से पीपल वृक्ष का पूजन करने तथा जल और दूध से सींचने से व्यक्ति को स्वर्ग के सुख से वंचित नहीं रहना पड़ता। इसकी पूजा करने से संतान की रक्षा, धन की वृद्धि, यश, विजय, मान-सम्मान की प्राप्ति तथा सभी प्रकार की शुभता प्राप्त होती है। पीपल के वृक्ष के नीचे किया गया जप, तप, हवन, पूजा-पाठ, मंत्र-यंत्र आदि करोड़ों गुना फलदायी होता है। इसकी जड़ में भगवान विष्णु, मध्य में शंकर तथा अग्र भाग में ब्रह्माजी का वास होता है। ऐसी स्थिति में कौन पीपल की पूजा नहीं करेगा?
अर्थ: गीता में भगवान कृष्ण ने इस वृक्ष को अपनी महिमा कहा है। ‘अश्वत्थ: सर्व वृक्षाणाम्’। अर्थात् वृक्षों में मैं पीपल हूँ। इसकी जड़ में भगवान विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में भगवान श्रीहरि तथा फलों में सभी देवताओं सहित अच्युत निवास करते हैं। यह वृक्ष श्री विष्णु का स्वरूप है। जो व्यक्ति नदी, जलाशय, कुआं, झील, तालाब आदि के निकट या किनारे पीपल का पौधा लगाता है, वह व्यक्ति सभी पुण्यों को प्राप्त करता है।- पं. जय गोविंद शास्त्री




