शनि दोष से मुक्ति का सरल उपाय: सरसों के तेल का दीपक जलाने का महत्व

सरसों के तेल का दीपक जलाना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इससे शनि दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में सफलता, शांति और समृद्धि आती है। हिंदू धर्म में शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है और वे मनुष्यों को समृद्धि प्रदान करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में होता है, या शनि की महादशा या साढ़ेसाती के प्रभाव में होता है, उन्हें कई कठिनाइयों और बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इसे ही शनि दोष कहते हैं। ऐसे में लोग शनि को प्रसन्न करने के उपाय करते हैं। इनमें से एक सबसे प्रमुख उपाय है सरसों के तेल का दीपक जलाना। ऐसा माना जाता है कि इससे शनि दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
आइए इस परंपरा की धार्मिक मान्यताओं और महत्व के बारे में जानें…
पौराणिक कथाओं के अनुसार, शनि देव को काला रंग, काले तिल और सरसों का तेल विशेष रूप से प्रिय है। ऐसा कहा जाता है कि सरसों का तेल शनि देव को प्रसन्न करने का एक प्रमुख साधन है। यही कारण है कि भक्त शनिवार को शनि मंदिरों में सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं।
सरसों के तेल का दीपक कब जलाना चाहिए?
शनिवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाना शुभ माना जाता है।
पीपल के पेड़ के नीचे या शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाना विशेष फलदायी होता है।
दीपक जलाते समय “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करने से शनि प्रसन्न होते हैं।
लोहे या मिट्टी के बर्तन में दीपक जलाना हमेशा सर्वोत्तम माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और शनि दोष से मुक्ति मिलती है। यह उपाय कार्य में आने वाली बाधाओं को दूर करता है और जीवन में स्थिरता लाता है। शनि के प्रभाव से होने वाली बीमारियाँ, दुर्घटनाएँ और आर्थिक संकट भी कम होने लगते हैं।
पीपल के पेड़ के नीचे दीपक क्यों?
शास्त्रों के अनुसार, शनि देव का निवास पीपल के पेड़ में माना जाता है। शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह उपाय पाप कर्मों के बंधनों को तोड़ता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से, सरसों का तेल वातावरण को शुद्ध करता है। सरसों के तेल का दीपक जलाने से उत्पन्न सुगंध और धुआँ वातावरण से कीटाणुओं को दूर भगाता है।
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