लंबे गेमिंग सेशन में फोकस बढ़ा सकता है स्पार्कलिंग वॉटर, नई स्टडी में सामने आया दिलचस्प खुलासा
जापान की रिसर्च के मुताबिक कार्बोनेटेड पानी पीने से गेमर्स में थकान कम हो सकती है और लंबे समय तक ध्यान बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

ई-स्पोर्ट्स खेलने वाले गेमर्स अक्सर लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठकर खेलते हैं। ऐसे में ध्यान और ऊर्जा बनाए रखने के लिए कई लोग कॉफी या एनर्जी ड्रिंक का सहारा लेते हैं। हालांकि ज्यादा कैफीन का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसी वजह से वैज्ञानिक यह जानना चाहते थे कि क्या कोई healthy option भी हो सकता है।
जापान की University of Tsukuba के शोधकर्ताओं ने इस विषय पर एक रोचक स्टडी की। उन्होंने यह जांचने की कोशिश की कि क्या स्पार्कलिंग वॉटर लंबे गेमिंग सेशन के दौरान ध्यान और सतर्कता बनाए रखने में मदद कर सकता है।
इस रिसर्च में 14 कैजुअल गेमर्स को शामिल किया गया। उन्हें दो अलग-अलग दिनों में करीब तीन घंटे तक वर्चुअल सॉकर गेम खेलने के लिए कहा गया। एक सेशन में प्रतिभागियों ने साधारण पानी पिया, जबकि दूसरे सेशन में उन्होंने स्पार्कलिंग वॉटर का सेवन किया।
रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने खिलाड़ियों के reaction time, पुतलियों के आकार, शारीरिक तनाव और खुद महसूस की गई थकान जैसे कई संकेतकों को मापा। इन आंकड़ों से पता चला कि स्पार्कलिंग वॉटर पीने वाले प्रतिभागियों में थकान कम महसूस हुई और उनका ध्यान लंबे समय तक स्थिर बना रहा।
शोधकर्ताओं के मुताबिक सादे पानी की तुलना में कार्बोनेटेड पानी ने खिलाड़ियों में मानसिक थकान बढ़ने की गति को धीमा किया और गेमिंग के दौरान आनंद का स्तर भी बढ़ाया। इसके साथ ही पुतलियों के सिकुड़ने की प्रक्रिया भी कम देखी गई, जो सामान्यतः थकान का संकेत माना जाता है।
हालांकि हार्ट रेट, ब्लड ग्लूकोज और कोर्टिसोल जैसे शारीरिक संकेतकों में दोनों परिस्थितियों के बीच कोई खास अंतर नहीं पाया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसका कारण स्पार्कलिंग वॉटर में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड हो सकता है। यह मुंह में मौजूद कुछ संवेदनशील रिसेप्टर्स को सक्रिय कर सकती है, जिससे दिमाग की सक्रियता थोड़ी बढ़ जाती है और व्यक्ति अधिक सतर्क महसूस करता है।
खिलाड़ियों ने यह भी बताया कि स्पार्कलिंग वॉटर पीने के दौरान उन्हें गेम खेलने में ज्यादा मजा आया और वे अपनी टीम के नियंत्रण में भी बेहतर महसूस कर रहे थे। दिलचस्प बात यह रही कि स्पार्कलिंग पानी पीने वाले खिलाड़ियों ने खेल के दौरान अपेक्षाकृत कम फाउल किए।
हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस स्टडी को एक सॉफ्ट ड्रिंक कंपनी से आंशिक फंडिंग मिली थी, जो स्पार्कलिंग वॉटर बनाती है। फिर भी शोधकर्ताओं का कहना है कि फंडिंग स्रोत का स्टडी के डिजाइन, डेटा विश्लेषण या निष्कर्षों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में और बड़े स्तर पर रिसर्च की जरूरत है ताकि यह समझा जा सके कि स्पार्कलिंग वॉटर वास्तव में कितनी हद तक ध्यान और मानसिक प्रदर्शन को प्रभावित करता है। साथ ही इसे कॉफी या एनर्जी ड्रिंक जैसे अन्य पेय पदार्थों के साथ तुलना करके भी जांचा जा सकता है।
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