सुप्रीम कोर्ट ने इंजीनियर के बच्चे की कस्टडी निकिता सिंघानिया को दी

Atul Subhash suicide case: तकनीकी विशेषज्ञ अतुल सुभाष आत्महत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनके बेटे की कस्टडी उनकी पत्नी निकिता सिंघानिया को दे दी है, जिस पर अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर सुभाष को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। जस्टिस बी वी नागरत्ना और एस सी शर्मा की पीठ ने यह फैसला लिया। यह फैसला अतुल की मां अंजू देवी द्वारा बच्चे की कस्टडी के लिए कोर्ट में याचिका दायर करने के कुछ दिनों बाद आया, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। उस समय कोर्ट ने कहा था कि अंजू देवी बच्चे के लिए “वस्तुतः अजनबी” हैं, इसलिए बच्चे की कस्टडी उन्हें नहीं दी जानी चाहिए।
अंजू देवी ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि उनके पोते की कस्टडी उन्हें दी जाए और तर्क दिया था कि इस उम्र के बच्चों को बोर्डिंग स्कूल में नहीं भेजा जाना चाहिए। अपनी दलीलों के समर्थन में उन्होंने सुभाष की मौत के मामले में निकिता सिंघानिया पर लगे आरोपों का हवाला दिया। कोर्ट ने बच्चे से बात करने की इच्छा जताई थी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ऑनलाइन बातचीत की थी। बताया जाता है कि अतुल सुभाष का बच्चा हरियाणा के एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार और सिंघानिया से बच्चे की हालत पर हलफनामा मांगा है।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि सिंघानिया को अभी तक दोषी नहीं ठहराया गया है और मामले के बारे में केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के खिलाफ चेतावनी दी। बेंगलुरु के इंजीनियर अतुल सुभाष की पिछले साल दिसंबर में आत्महत्या से मौत हो गई थी।
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