सर्वोच्च न्यायालय ने शैक्षणिक संस्थानों में आत्महत्याओं को रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए

इंडिया : देश भर के स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या और उनके मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को शैक्षणिक संस्थानों के लिए 15 बाध्यकारी दिशानिर्देश जारी किए। इनका पालन तब तक अनिवार्य होगा जब तक सरकार छात्रों की आत्महत्या रोकने के लिए कोई कानून या नियामक ढांचा नहीं बना लेती। केंद्र और राज्य सरकारों को 90 दिनों में इस पर अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने विशाखापत्तनम में छात्रावास की छत से गिरकर संदिग्ध परिस्थितियों में मारे गए 17 वर्षीय नीट अभ्यर्थी के मामले का फैसला सुनाते हुए ये दिशानिर्देश जारी किए।
पीठ ने नीट अभ्यर्थी की मौत की सीबीआई जांच के भी आदेश दिए। दिशानिर्देश जारी करते हुए पीठ ने कहा कि सभी शैक्षणिक संस्थान उम्मीद मसौदा दिशानिर्देशों, मनोदर्पण पहल और राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति से प्रेरणा लेते हुए एक समान मानसिक स्वास्थ्य नीति अपनाएंगे और उसे लागू करेंगे। इस नीति की हर साल समीक्षा और अद्यतन किया जाएगा। इसे संस्थानों की वेबसाइटों और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। मसौदा दिशानिर्देश (HOPE) का उद्देश्य स्कूली छात्रों की आत्महत्याओं को रोकना है। इसे शिक्षा मंत्रालय द्वारा 2023 में जारी किया गया था।
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