राहु-केतु की अशुभता दूर करने के अचूक उपाय

यदि जन्म कुंडली में कालसर्प योग है तो किसी सिद्ध शिव क्षेत्र में विधिवत शांति करवाएं। संपूर्ण कालसर्प यंत्र स्थापित करें तथा प्रतिदिन सर्प सूक्त का पाठ करें। नाग गायत्री मंत्र का जाप करना लाभकारी होता है। सोमवार को नजदीकी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाएं। लाल किताब के अनुसार गणेश जी की पूजा करके केतु की अशुभता को शुभता में बदला जा सकता है।लाल किताब में बताया गया है कि देवी सरस्वती की पूजा करने से राहु की अशुभता शुभता में बदल जाती है। गोमेद और वैदूर्य रत्न जड़ित चांदी के नाग के आकार का लॉकेट पहनने से राहु और केतु की शुभता बढ़ती है।
राहु और केतु छाया ग्रह हैं। दुर्गा की पूजा करने से इनकी शांति होती है क्योंकि देवी दुर्गा को छाया स्वरूप कहा गया है। नाग-नथिया कृष्ण-कन्हैया की तस्वीर के सामने बैठकर प्रतिदिन 108 बार ओम नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें, शुभ फल मिलेंगे। राहु और केतु की प्रतीकात्मक वस्तुओं को किसी योग्य व्यक्ति को दान करने से इन दोनों ग्रहों के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है। श्रावण मास में प्रतिदिन भगवान शंकर को जल चढ़ाने से राहु और केतु जातक को कष्ट नहीं पहुंचा पाते। राहु-केतु की शांति के लिए श्रावण के सोमवार का व्रत और सोलह सोमवार का व्रत दोनों ही समान रूप से लाभकारी माने गए हैं।
पीड़ा देने वाले राहु-केतु को प्रसन्न करने के लिए नियमित रूप से रात्रि में उनके बीज मंत्रों का जाप करें। शिव सहस्रनाम और हनुमान सहस्रनाम का प्रतिदिन पाठ करने से कई प्रकार की ग्रह पीड़ा शांत होती है। कन्यादान करने से राहु का प्रकोप शांत होता है और कपिला गाय का दान करने से केतु का प्रकोप शांत होता है। राहु के लिए हल्का नीला और केतु के लिए हल्का गुलाबी वस्त्र पहनना और दान करना शांति प्रदान करता है। राहु-केतु की शांति के लिए राहु-केतु की पूजा करनी चाहिए और 18-18 शनिवार व्रत रखना चाहिए। राहु की शांति के लिए सफेद मलयागिरी चंदन का टुकड़ा नीले रेशमी कपड़े में लपेटकर बुधवार को पहनना चाहिए।
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