“पीओके में भड़का सबसे बड़ा जनआंदोलन – सेना और सरकार के खिलाफ़ गूंजे आज़ादी के नारे!”

मुज़फ़्फ़राबाद। इस बार, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में विरोध प्रदर्शन पहले से कहीं ज़्यादा व्यापक, संगठित और प्रभावी हो गए हैं। पाकिस्तानी सेना की क्रूरता, महंगाई, बिजली की कमी और राजनीतिक असंतोष के चलते, यह विरोध प्रदर्शन अब गाँवों और कस्बों तक फैल गया है, जहाँ “पीओके आज़ादी मांगे” जैसे नारे लग रहे हैं। राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद से रावलकोट, कोटली, मीरपुर और अन्य ज़िलों तक फैले इस आंदोलन ने सेना और सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, पहले विरोध प्रदर्शन राजधानी तक ही सीमित थे। अब यह ढाँचा बिखर गया है। रावलकोट में वकीलों और शिक्षकों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। कोटली में युवाओं और छात्रों ने एक लंबा मार्च निकाला। मीरपुर कस्बों में, ट्रेड यूनियनों ने बाज़ार बंद कर दिए। ग्रामीण किसानों और छोटे दुकानदारों ने भी विरोध प्रदर्शन किए। हाल ही में कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई हैं, जिससे पाकिस्तानी सेना और सरकार के लिए चुनौती और गहरी हो गई है।
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