
छत्तीसगढ़ ने बुनियादी ढांचे के विकास में इतिहास रच दिया है। राज्य को अपनी पहली राष्ट्रीय राजमार्ग सुरंग मिल गई है। केशकाल की पहाड़ियों के बीच 2.79 किलोमीटर लंबी, तीन लेन वाली ट्विन ट्यूब सुरंग के एक तरफ की खुदाई महज 12 महीनों में पूरी कर ली गई है। यह उपलब्धि न केवल इंजीनियरिंग कौशल का उदाहरण है, बल्कि छत्तीसगढ़ के आर्थिक और सामाजिक विकास को एक नई दिशा देने का भी वादा करती है। यह सुरंग रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक गलियारे (NH-130CD) का हिस्सा है, जिसका निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की अभनपुर परियोजना इकाई द्वारा किया जा रहा है।
जब दोनों सुरंगें पूरी तरह से बन जाएंगी, तो रायपुर से विशाखापत्तनम की यात्रा बहुत आसान और तेज हो जाएगी। उद्योग और व्यापार को नई गति मिलेगी, और छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच संपर्क गहरा होगा। विशाखापत्तनम एक्सप्रेसवे के हिस्से के रूप में केशकाल की पहाड़ियों को काटकर इस छह लेन वाली सुरंग का निर्माण किया जा रहा है। एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप कुमार लाल ने बताया कि एक तरफ खुदाई का काम पूरा हो चुका है और दूसरी तरफ नवंबर तक काम पूरा होने की उम्मीद है। 464 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर 20,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। पूरा कॉरिडोर 464 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें छत्तीसगढ़ में 124 किलोमीटर, ओडिशा में 262 किलोमीटर और आंध्र प्रदेश में 100 किलोमीटर शामिल हैं।
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