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हिंदी साहित्य के महान रचनाकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन, साहित्य जगत में शोक

छत्तीसगढ़ । छत्तीसगढ़ के जाने-माने हिंदी साहित्यकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार को एम्स रायपुर में निधन हो गया। उन्होंने 89 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। वे एम्स रायपुर में इलाज करवा रहे थे और सांस लेने में दिक्कत के कारण उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर वेंटिलेटर पर रखा गया था। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को सुबह 11 बजे मारवाड़ी मुक्तिधाम में किया जाएगा। मशहूर उपन्यासकार, लेखक और कवि विनोद कुमार शुक्ल ने उपन्यास और कविता दोनों विधाओं में साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी पहली कविता, जिसका शीर्षक ‘लगभग जयहिंद’ था, 1971 में प्रकाशित हुई थी।

उनके प्रमुख उपन्यासों में ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’, ‘नौकर की कमीज’ और ‘खिलेगा तो देखेंगे’ शामिल हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे एक बड़ी क्षति बताया। उन्होंने कहा कि विनोद जी, जिन्होंने ‘नौकर की कमीज’ और ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ जैसे अपने प्रशंसित कार्यों के माध्यम से सामान्य जीवन को गरिमा दी, वे हमेशा छत्तीसगढ़ के लिए गौरव के स्रोत के रूप में हमारे दिलों में रहेंगे। उनकी भावनात्मक रूप से समृद्ध रचनाएँ पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। सरकार ने उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने का फैसला किया है।

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