सच्ची मदद वही है, जो बिना एहसास कराए आत्मनिर्भर बना दे

एक छोटा पक्षी अपने परिवार से बिछड़ कर चौसाले से बहुत दूर आ गया था। छोटा पक्षी समझ नहीं पा रहा था कि अपने घोंसले तक कैसे पहुंचे। वह उड़ने की पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन बार-बार थोड़ा ऊपर उड़कर नीचे गिर जाता। दो पक्षी दूर से यह दृश्य बड़े ध्यान से देख रहे थे। कुछ देर देखने के बाद वे छोटे पक्षी के करीब आ गए। छोटा पक्षी उन्हें देखकर थोड़ा डर गया। उन पक्षियों में से एक बहुत बूढ़ा और समझदार था, उसने छोटे पक्षी से पूछा, ‘क्या हुआ छोटे पक्षी, तुम बहुत परेशान लग रहे हो?’ उसने कहा, ‘मैं रास्ता भटक गया हूं और मुझे शाम से पहले अपने घर लौटना है। मेरे परिवार वाले बहुत परेशान होंगे। क्या तुम मुझे उड़ना सिखा सकते हो? मैं बहुत समय से कोशिश कर रहा हूं लेकिन सफलता नहीं मिल रही है।’ बूढ़े पक्षी ने (कुछ देर सोचने के बाद) कहा, ‘जब तुमने उड़ना सीखा ही नहीं, तो इतनी दूर आने की क्या जरूरत थी?’ वह छोटे पक्षी का मजाक उड़ाने लगा।
छोटा पक्षी उसकी बातों से बहुत क्रोधित हो रहा था। बूढ़ा पक्षी हंसा और बोला, देखो हम उड़ना जानते हैं और जहां चाहें जा सकते हैं। यह कहकर बूढ़ा पक्षी नन्हे पक्षी के सामने पहली उड़ान मर गया। वह थोड़ी देर बाद वापस आया और कुछ कड़वे शब्द बोले और फिर से उड़ गया। उसने ऐसा पांच-छह बार किया और जब इस बार वह उड़कर वापस आया तो नन्हा पक्षी वहां नहीं था। बूढ़े पक्षी ने अपने मित्र से पूछा, नन्हा पक्षी क्यों उड़ा? उस समय बूढ़े पक्षी के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। मित्र पक्षी बोला, नन्हा पक्षी उड़ गया लेकिन तुम इतने खुश हो? तुमने उसका कितना मजाक उड़ाया था। बूढ़े पक्षी ने कहा, मित्र तुमने केवल मेरी नकारात्मकता पर ध्यान दिया लेकिन नन्हा पक्षी मेरी नकारात्मकता पर कम और सकारात्मकता पर ज्यादा ध्यान दे रहा था। इसका मतलब है कि मेरे मजाक को नजरअंदाज करके उसने मेरे उड़ने की चाल पर ज्यादा ध्यान दिया और वह उड़ने में सफल रहा।
मित्र पक्षी ने कहा, ‘जब तुम्हें उसे उड़ना सिखाना ही था, तो तुमने उसका मजाक उड़ाकर उसे क्यों सिखाया अगर मैंने उसे सीधे रास्ते पर उड़ना सिखाया होता, तो वह जीवन भर मेरी कृतज्ञता का पात्र बना रहता और शायद आगे ज़्यादा कोशिश न करता। मैंने उस पक्षी में छिपे जुनून को पहचान लिया था। जब मैंने उसे कोशिश करते देखा, तो समझ गया कि उसे बस थोड़ी सी दिशा की ज़रूरत है और मैंने अनजाने में उसे दिशा दे दी और वह अपनी मंज़िल तक पहुँचने में कामयाब हो गया। सच्ची मदद वह है जो मदद पाने वाले को यह एहसास ही न होने दे कि उसकी मदद हुई है। कई बार लोग मदद तो करते हैं, लेकिन उसका बतंगड़ बनाने से भी नहीं चूकते, ऐसी मदद का क्या फ़ायदा। यह कहानी हम इंसानों के लिए एक सीख है कि हमें लोगों की मदद तो करनी चाहिए, लेकिन उनसे जलन नहीं करनी चाहिए।
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