उन्नाव कस्टडी डेथ केस: दिल्ली हाई कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत देने से किया इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस रविंदर डुडेजा ने यह आदेश सुनाते हुए सेंगर की सज़ा निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी। यह फैसला कई कानूनी प्रक्रियाओं और मामले की चल रही जांच के बाद आया है, जिसने पूरे भारत में लोगों और मीडिया का काफी ध्यान खींचा है। कुलदीप सिंह सेंगर 13 अप्रैल, 2018 से हिरासत में हैं। वह फिलहाल उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की जेल की सज़ा काट रहे हैं। इसके अलावा, सेंगर नाबालिग से रेप के मामले में भी उम्रकैद की सज़ा काट रहे हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर गुस्से का मुख्य कारण रहा है।
मौजूदा जमानत याचिका विशेष रूप से हिरासत में मौत के मामले में दोषी ठहराए जाने से संबंधित है, जो सेंगर से जुड़े कानूनी मामलों में एक विवादास्पद मुद्दा रहा है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 23 दिसंबर, 2025 को सेंगर को नाबालिग से रेप के मामले में जमानत दी गई थी, लेकिन इस आदेश पर बाद में 29 दिसंबर, 2025 को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी, जिससे उनकी हिरासत से रिहाई रुक गई। मौजूदा जमानत याचिका विशेष रूप से हिरासत में मौत के मामले में दोषी ठहराए जाने से संबंधित है, जो सेंगर से जुड़े कानूनी मामलों में एक विवादास्पद मुद्दा रहा है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 23 दिसंबर, 2025 को सेंगर को नाबालिग से रेप के मामले में जमानत दी गई थी, लेकिन इस आदेश पर बाद में 29 दिसंबर, 2025 को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी, जिससे उनकी हिरासत से रिहाई रुक गई।
पीड़ित पक्ष द्वारा प्रस्तुत तर्क
जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान, वकील महमूद प्राचा रेप पीड़िता की ओर से पेश हुए और कुलदीप सिंह सेंगर को किसी भी तरह की राहत देने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि सेंगर की रिहाई से पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा को बड़ा खतरा होगा। प्राचा ने आगे कहा कि पीड़िता को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार उत्पीड़न और बदनामी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे परिवार को होने वाले सदमे और चुनौतियों में और इजाफा हुआ है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अपराध की गंभीरता और पीड़िता के परिवार पर पड़ रहे लगातार प्रभाव को देखते हुए सेंगर को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। पीड़ित पक्ष द्वारा पेश की गई दलीलों में सुरक्षा को लेकर लगातार बनी चिंताओं और पीड़िता और उसके परिवार पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक असर पर ज़ोर दिया गया, जो मामला सामने आने के बाद से ही लगातार मुद्दे बने हुए हैं।
मौजूदा स्थिति और चल रही कानूनी कार्यवाही
कस्टडी में मौत के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा ज़मानत न देने के फैसले का मतलब है कि वह हिरासत में ही रहेगा। इस मामले में कानूनी कार्यवाही जटिल रही है, जिसमें अलग-अलग अदालतों में कई अपीलें और आवेदन दायर किए गए हैं। भारत के सुप्रीम कोर्ट द्वारा नाबालिग रेप मामले में दी गई ज़मानत पर रोक लगाने से सेंगर से जुड़ी कानूनी स्थिति और भी जटिल हो गई है।
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