विज्ञान

आखिर क्यों गिरने के बाद भी अपने पैरों पर उतरती है बिल्ली? नई रिसर्च में मिला दिलचस्प जवाब

वैज्ञानिकों के मुताबिक बिल्लियों की रीढ़ की खास बनावट उन्हें हवा में घूमकर सही तरीके से जमीन पर उतरने में मदद करती है।

दुनिया भर के वैज्ञानिक लंबे समय से इस बात को समझने की कोशिश कर रहे हैं कि गिरते समय बिल्ली किस तरह अपने शरीर को घुमाकर लगभग हमेशा पैरों के बल जमीन पर उतर जाती है। इस रहस्य पर शोध एक सदी से भी ज्यादा समय से जारी है, और अब एक नई research ने इसके पीछे के शारीरिक कारणों पर नई रोशनी डाली है।

जापान की Yamaguchi University के वैज्ञानिकों की टीम ने पाया कि बिल्लियों की रीढ़ की हड्डी के अलग-अलग हिस्सों की लचक और कठोरता में फर्क इस अद्भुत क्षमता में अहम भूमिका निभाता है।

रिसर्च के अनुसार बिल्ली की रीढ़ दो मुख्य भागों में बंटी होती है—थोरैसिक स्पाइन (ऊपरी हिस्सा) और लम्बर स्पाइन (निचला हिस्सा)। अध्ययन में पाया गया कि थोरैसिक स्पाइन काफी ज्यादा लचीली होती है, जबकि लम्बर स्पाइन अपेक्षाकृत सख्त होती है।

वैज्ञानिकों ने रीढ़ के विभिन्न हिस्सों का analysis करते हुए टॉर्क, घूमने का कोण, कठोरता और न्यूट्रल ज़ोन जैसी विशेषताओं को मापा। न्यूट्रल ज़ोन वह स्थिति होती है जहां कम बल से भी मूवमेंट हो सकता है।

परिणामों में सामने आया कि थोरैसिक रीढ़ की गति की सीमा लम्बर रीढ़ की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक होती है। इसके अलावा थोरैसिक स्पाइन की कठोरता भी कम होती है, जिससे वह आसानी से मुड़ सकती है।

यह रहस्य पहली बार 19वीं सदी के अंत में वैज्ञानिकों की नजर में आया था। फ्रांसीसी फिजियोलॉजिस्ट Étienne-Jules Marey ने हाई-स्पीड फोटोग्राफी की मदद से गिरती हुई बिल्ली की तस्वीरें ली थीं। उन तस्वीरों में देखा गया कि बिल्ली बिना घूमे गिरना शुरू करती है, लेकिन जमीन पर पहुंचने से पहले किसी तरह अपना शरीर घुमा लेती है।

फिजिक्स में यह घटना “फॉलिंग कैट प्रॉब्लम” के नाम से जानी जाने लगी, क्योंकि यह एंगुलर मोमेंटम के नियम को चुनौती देती हुई दिखाई देती थी।

नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने दान में मिली बिल्लियों के शरीर से रीढ़ की हड्डी के हिस्सों को निकालकर उनकी जांच की। प्रत्येक रीढ़ को दो हिस्सों में बांटा गया और फिर विशेष उपकरणों से यह जांचा गया कि उसे कितना मोड़ा जा सकता है।

इसके बाद शोधकर्ताओं ने दो जीवित बिल्लियों पर भी अध्ययन किया। उन्हें लगभग एक मीटर की ऊंचाई से मुलायम कुशन पर गिराया गया और पूरे प्रोसेस को हाई-स्पीड कैमरे से रिकॉर्ड किया गया।

वीडियो से पता चला कि बिल्ली एक ही बार में पूरा शरीर नहीं घुमाती। पहले उसके शरीर का आगे का हिस्सा मुड़ता है और कुछ मिलीसेकंड बाद पीछे का हिस्सा घूमता है। दोनों हिस्सों के घूमने के बीच करीब 70 से 90 मिलीसेकंड का अंतर पाया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार यह क्रमिक घुमाव ही बिल्ली को हवा में संतुलन बनाने में मदद करता है। पहले हल्का और ज्यादा लचीला आगे का हिस्सा घूमता है, उसके बाद भारी और सख्त पिछला हिस्सा अपनी दिशा बदलता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि रीढ़ की यही खास बनावट बिल्लियों को दौड़ते समय तेज मोड़ लेने और ऊंची छलांग के बाद संतुलन बनाने में भी मदद करती है।

यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल The Anatomical Record में प्रकाशित हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि आगे की स्टडीज़ से यह समझने में मदद मिल सकती है कि स्तनधारी जानवरों की रीढ़ की बनावट उनकी गति और फुर्ती को किस तरह प्रभावित करती है।

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