धर्म-अध्यात्म

माँ दुर्गा को नारायणी या वैष्णवी क्यों कहा जाता है

माँ दुर्गा शाक्त सम्प्रदाय की देवी हैं और उनके गुणों और प्रकृति के आधार पर उन्हें कई नाम दिए गए हैं। उन्हें नारायणी और वैष्णवी भी कहा गया है, जो कि उनके किसी गुण या प्रकृति से नहीं मिलता। ऐसे में मन में ये सवाल उठता है कि माँ दुर्गा को इन दो नामों से क्यों पुकारा जाता है? इन दो नामों के पीछे का रहस्य क्या है?

माँ दुर्गा शाक्त सम्प्रदाय से आती हैं। हन्दूि ग्रन्थों में वे शिव की पत्नी दुर्गा के रूप में वर्णित हैं क्योंकि माँ दुर्गा को माता पार्वती का ही स्वरूप समझा जाता है। माँ दुर्गा 10 महावद्यिा के रूप में भी जानी जाती हैं। इन सबके अतिरक्ति उन्हें नारायणी और वैष्णवी भी कहा जाता है, लेकिन बहुत कम लोग इन दो नामों के पीछे का कारण जानते हैं। इन दो नामों के पीछे का कारण बेहद दिलचस्प है।नारायणी का आध्यात्मिक अर्थ नारायणी का एक अर्थ यह लिया जाता है कि ‘वह जो भगवान नारायण के पीछे की शक्ति है’।. देवी दुर्गा को पद्मनाभ-सहोदरी भी कहते ‘हैं।

उदर का अर्थ है ‘गर्भ’ और सहोदरी का अर्थ है ‘बहन’। पद्मनाभ, नारायण या विष्णु को दिया गया नाम है। इस प्रकार, देवी दुर्गा, भगवान नारायण की बहन का प्रतिनि धित्व करती हैं। इन सबके अतिरक्ति माँ दुर्गा को दिया गया नारायणी नाम का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। नारायणी का अर्थ ‘चेतना को उजागर करने वाली’। पुराणों के अनुसार, माँ दुर्गा ने नारायणी रूप धारण कर असुरों का संहार किया था। ऐसे में नारायणी इस बात का प्रतीक है, जो दुष्टता का नाश करता है और धर्म की रक्षा करता है। इसके अलावा, नारायणी नाम का प्रयोग सृष्टि का पालन और संहार करने वाली शक्ति के रूप में भी किया जाता है।

पौराणिक कथाओं में नारयाणी: ब्रह्मवैवर्त पुराण में यह बताया गया है कि माँ दुर्गा का दूसरा नाम नारायणी है। देवी महात्म्य में भी माँ दुर्गा को ह्यनारायणीण कहकर संबोधित किया गया है, जिसमें उनके विभन्नि अवतारों का वर्णन है। देवी महात्म्यमं में 16 श्लोक हैं, जन्हेिं नारायणी स्तुति कहा जाता है और जिसमें देवी के इस रूप का आह्वान और पूजा की जाती है। उन्हें यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि कई पौराणिक कथाओं में उन्हें भगवान वष्णुि की बहन के रूप में बताया गया है।

माँ लक्ष्मी को भी नारायणी कहा जाता है, लेकिन एक पत्नी के रूप में, वहीं माँ दुर्गा को नारायणी और वैष्णवी कहा जाता है एक बहन के रूप में। उनका भगवान् विष्णु से इस संबंध का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है, जब अर्जुन ने कुरुक्षेत्र के युद्ध में जाने से पहले माँ दुर्गा की पूजा की थी। उस पूजा में अर्जुन ने माँ दुर्गा को श्री कृष्ण, जो साक्षात नारायण के अवतार माने जाते हैं, की बहन के रूप में संबोधित किया था। इसके अलावा एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान् शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, तो उस विवाह में भाई की भूमिका भगवान् विष्णु ने ही निभाई थी। ऐसी कई पौराणिक कहानियाँ हैं, जिसमें भगवान् विष्णु को माता पार्वती का भाई बताया गया है।

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