फरवरी में सर्दी हुई गायब, असामान्य गर्मी ने बढ़ाई चिंता

Senior Reporter India | आमतौर पर फरवरी को ठंड का आख़िरी पड़ाव माना जाता है, लेकिन इस वर्ष मौसम ने अलग ही रुख दिखाया है। महीने के शुरुआती पंद्रह दिनों में देश के अधिकांश इलाकों में दिन और रात दोनों का तापमान सामान्य स्तर से ऊपर दर्ज किया गया। कई बड़े शहरों में अधिकतम तापमान औसत से अधिक रहा, जबकि न्यूनतम तापमान भी लगातार कई दिनों तक सामान्य से ज्यादा बना रहा।
कमज़ोर पश्चिमी विक्षोभ के कारण इस बार सर्दियों में न के बराबर बारिश और बर्फबारी हुई। इसका असर अब खेतों और पशुधन पर दिखने लगा है। रबी की फसलें, हरी सब्ज़ियां और पानी के स्रोत दबाव में हैं, जिससे Food Security पर खतरा गहराने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति लंबे समय में Supply Chain को भी प्रभावित कर सकती है।
राजधानी शहरों और प्रमुख शहरी क्षेत्रों के आंकड़ों के विश्लेषण से साफ संकेत मिलते हैं कि फरवरी के पहले दो हफ्तों में गर्मी ने समय से पहले दस्तक दे दी। कुछ शहरों में लगातार पूरे पंद्रह दिन तक अधिकतम तापमान औसत से ऊपर दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान में भी असामान्य बढ़ोतरी देखी गई।
चिंता की बात यह है कि यह असर सिर्फ मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं रहा। पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में भी तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया। कई हिमालयी राज्यों में सूखी सर्दी देखने को मिली, जहां बारिश और हिमपात लगभग नहीं के बराबर रहा।
मौसम विभाग के अनुसार, सर्दियों के दौरान कमजोर पश्चिमी विक्षोभ इसका प्रमुख कारण है। लगातार बढ़ता तापमान Climate Change की ओर भी इशारा करता है। बीते कुछ वर्षों से सर्दियों का औसत तापमान बढ़ रहा है और ठंड का मौसम छोटा होता जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो खेती, जल संसाधनों और खाद्य व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। फरवरी का यह बदलता मिजाज आने वाले महीनों के लिए एक चेतावनी माना जा रहा है।
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