भारत में महिलाएं घर और ऑफिस में AI का इस्तेमाल कर रही हैं, प्राइवेसी बनी बड़ी चुनौती

New Delhi /रिपोर्ट । भारत में महिलाओं ने अपने रोज़मर्रा के फैसलों और कामों में AI का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, हालांकि इस मामले पर एक्सपर्ट्स की राय मिली-जुली है। प्रियांशी दुर्बा एक दशक से नई टेक्नोलॉजी के साथ काम कर रही हैं। वह अभी कंपनियों को सिखाती हैं कि वे अपने काम में AI का इस्तेमाल कैसे करें। लेकिन AI ने उनकी ज़िंदगी में जो सबसे बड़ा बदलाव लाया है, वह ऑफिस में नहीं, बल्कि उनके किचन में है। यह आइडिया उन्हें एक आम वीकेंड पर आया। उनके पास बहुत काम था और उनका दिमाग थक गया था। उन्हें अपने मैराथन दौड़ने वाले पति के लिए प्रोटीन से भरपूर खाना बनाना था, और उनके बच्चे की पसंद अलग थी।
इसलिए उन्होंने ChatGPT को अपना फूड इन्वेंटरी दिखाया और मील प्लान मांगा। इस AI टूल ने नाश्ता, लंच और डिनर प्लान किया। प्राइवेसी लीक का खतरा भी इस पूरे मामले का एक अहम पहलू है। कई महिलाएं चैटबॉट से ऐसी बातें भी डिस्कस करती हैं जो वे आमतौर पर साइकोलॉजिकल थेरेपी सेशन में करती हैं। उनके घरों, बच्चों, सेहत और लोकेशन के बारे में डिटेल्स चैटबॉट के साथ खुलकर शेयर की जाती हैं। हालांकि भारत का नया डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट लोगों को उनके डेटा पर अधिकार देता है और इसके इस्तेमाल के लिए उनकी सहमति ज़रूरी है, और ब्रीच रिपोर्टिंग भी ज़रूरी करता है, लेकिन घरेलू इस्तेमाल के कुछ पहलू अभी भी रेगुलेटेड नहीं हैं। दिल्ली के डेटा प्रोटेक्शन वकील विजयांत सिंह कहते हैं, “प्लेटफ़ॉर्म को सिक्योरिटी पक्का करनी चाहिए, नहीं तो कई बड़े खतरे सामने आ सकते हैं। जैसे ही आप अपने बच्चे का नाम और स्कूल का टाइमिंग चैटबॉट में टाइप करते हैं, स्थिति बदल जाती है।”
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