मजदूर की बेटी ने बनाई अनोखी धूल-रहित थ्रेशर मशीन, मिली अंतरराष्ट्रीय सराहना

इंडिया : भारत में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के अगेहरा गांव में तिरपाल से ढकी झोपड़ी को देखकर कोई नहीं कह सकता कि इस झोपड़ी के अंधेरे में देश का नाम रोशन करने वाली एक प्रतिभा पनप रही है। इस घर (झोपड़ी) में रहने वाली 12वीं की छात्रा 17 वर्षीय पूजा पाल पिछले चार सालों से अपने वैज्ञानिक मॉडल पर काम कर रही हैं। उसने न सिर्फ इसे पूरा किया है बल्कि उस मॉडल को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है। हाल ही में पूजा को अपने मॉडल के साथ जापान आमंत्रित किया गया था। पूजा के इस वैज्ञानिक मॉडल का नाम डस्ट फ्री थ्रेशर है। पूजा के शिक्षक राजीव श्रीवास्तव इसका श्रेय सरकार की इंस्पायर अवार्ड योजना को देते हैं।
उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया, यह एक बेहतरीन योजना है जिसके तहत बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि और नवाचार की क्षमता देखी जाती है। सरकार चयनित मॉडलों के लिए 10 हजार रुपये देती है ताकि छात्र अपना प्रोटोटाइप बना सकें। पूजा ने जब स्थानीय विज्ञान मेले में अपना मॉडल पेश किया था तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह प्रोजेक्ट उसे जापान ले जाएगा। हालांकि अब उसी प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है। वर्ष 2023 में इस मॉडल का चयन ‘इंस्पायर अवार्ड’ की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हुआ। पुरस्कार जीतने वाले देश भर के 60 बच्चों में से उत्तर प्रदेश से केवल पूजा का चयन हुआ। इन सभी 60 विजेताओं को सकुरा साइंस एक्सचेंज प्रोग्राम के माध्यम से उनके चयनित मॉडलों के साथ जापान भेजा जाता है। इसी के तहत पूजा हाल ही में जापान गई थीं जहाँ उन्हें दुनिया के कई वैज्ञानिकों और छात्रों से मिलने का मौका मिला।
नए खबरों के लिए बने रहे सटीकता न्यूज के साथ।




