विश्व पशु दिवस: जानवरों पर अत्याचार नहीं, करुणा और संरक्षण का संकल्प लें

शास्त्रों में घोर पाप, कानून में भी अपराध।
जानवरों को नुकसान पहुँचाने के बाद भी लोगों को ज़रा भी दया नहीं आती। खेतों में घुसने पर जानवरों को काट भी दिया जाता है। भारत में गाय को जितना सम्मान दिया जाता है, दुनिया के किसी और देश में नहीं। पशुपालन और डेयरी उद्योग रोज़गार प्रदान करते हैं, लेकिन जानवरों के साथ दुर्व्यवहार और उपेक्षा भी बढ़ रही है। लोगों को सड़कों पर आवारा जानवरों की देखभाल की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए। समाज में अक्सर देखा जाता है कि अगर कोई पालतू कुत्ते के बारे में शिकायत करता है, तो उस निर्दोष कुत्ते के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। पशु क्रूरता अधिनियम 1960 में बनाया गया था। यह जानवरों को पीटने, मारने या अपंग बनाने जैसे अपराधों को परिभाषित करता है। हमें पता होना चाहिए कि जानवरों के साथ क्रूरता न केवल कानूनी रूप से अपराध है, बल्कि शास्त्रों में भी इसे घोर पाप माना गया है। हमें विश्व पशु दिवस पर यह संकल्प लेना चाहिए कि हम किसी भी जानवर की उपेक्षा नहीं करेंगे। हमें जानवरों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का संकल्प लेना चाहिए।
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